आजीविका मिशन से आधी आबादी को आत्मनिर्भर बना रही सरकार
गोरखपुर, 08 मार्च (हि.स.)। आधी आबादी को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र और प्रदेश की डबल इंजन सरकार विशेष ध्यान दे रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं का जीवन संवारने में मददगार साबित हो रहा है। महिलाओं को स्वावलंबन का मंत्र देने के लिए गोरखपुर जिले में एनआरएलएम के तहत 21106 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन हो चुका है, जिसमें कुल 299892 महिलाएं आच्छादित हैं।
एनआरएलएम के माध्यम से समूहों से जुड़ी महिलाओं ने चूल्हे-चौके से आगे बढ़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह पकड़ी है। अब वे अपने परिवारों में आयार्जन करने वाले प्रमुख सदस्य की भी भूमिका में हैं। मोदी सरकार के इस मिशन को योगी सरकार तेजी से आगे बढ़ा रही है। स्वावलंबन के मंत्र से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, उनके आत्म सम्मान को नई ऊंचाई देने की दिशा में योगी सरकार के प्रयासों से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रति महिलाओं का रुझान बढ़ा है। इस मिशन से जुड़कर और प्रशिक्षण प्राप्त कर गांव की महिलाएं सब्जी उत्पादन, नमकीन उत्पादन, मशरूम उत्पादन, शहद उत्पादन, पशु पालन, कृषि कार्य, मसाला उत्पादन, कृत्रिम आभूषण निर्माण, बैग, ड्रेस, सॉफ्ट टॉयज, फाइल फोल्डर बनाने के साथ पुष्टाहार उत्पादन से जुड़कर आय अर्जित कर अपना जीवन समुन्नत बना रही हैं। उपायुक्त (स्वतः रोजगार) नीरजा गुप्ता बताती हैं कि गोरखपुर में कुल सक्रिय 21106 समूहों में से 629 का गठन वित्तीय वर्ष 2025-26 में हुआ है। इस वित्तीय वर्ष में 7950 नई सदस्य महिलाओं को जोड़ा गया है।
गोरखपुर में अब तक कुल 18446 समूहों को रिवॉल्विंग फंड निर्गत किया गया है। इनमें इस वित्तीय वर्ष में रिवॉल्विंग फंड पाने वाले 1006 समूह भी सम्मिलित हैं। समूहों को करीब 30 करोड़ रुपये की धनराशि रिवॉल्विंग फंड मद में दी गई है। इसके अलावा समूहों के संचालन के लिए एनआरएलएम के तहत सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से भी लाभान्वित किया जाता है। गोरखपुर में 15558 समूहों को सामुदायिक निवेश निधि का लाभ मिला है। समूहों की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने में बैंकों के कैश क्रेडिट लिंकेज (सीसीएल) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसमें बैंक द्वारा 600000 रुपये तक की लिमिट जारी की जाती है। प्रथम वर्ष 150000 रुपये की लिमिट होती है और सही व नियमित लेनदेन पर दूसरे किस्त में 300000 तथा तीसरे किस्त में यह लिमिट बढ़कर 600000 रुपये हो जाती है। मूल रूप से इस धनराशि का उपयोग समूह सदस्य आजीविका संवर्धन में करते हैं। गोरखपुर में अब तक 12210 समूहों को सीसीएल जारी हो चुकी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय