चोपन-चुनार रेल खंड पर दो महत्वपूर्ण पुराने पुलों का कायाकल्प पूर्ण

 


--साथ ही प्रयागराज मंडल के ओआरएन-2 वाले सभी पुलों पर कार्य हुआ पूरा

प्रयागराज, 26 मार्च (हि.स.)। उत्तर मध्य रेलवे की आधारभूत संरचना को आधुनिक बनाने और रेल परिचालन में गति एवं संरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में ज़ोन ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। चोपन-चुनार रेल खंड पर स्थित दो प्रमुख पुराने स्टील गर्डर पुलों, ब्रिज संख्या 48 और ब्रिज संख्या 46 का नवीनीकरण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है।

--ब्रिज संख्या 48ः ओआरएन-2 श्रेणी से मुक्ति और रिकॉर्ड समय में कार्ययह जानकारी वरिष्ठ जनसम्पर्क अधिकारी अमित मालवीय ने गुरूवार को देते हुए बताया कि वर्ष 1953 में निर्मित ब्रिज संख्या 48 (8 स्पैन) जो अपनी जर्जर स्थिति के कारण ओआरएन-2 श्रेणी में था, अब पूरी तरह से नया और आधुनिक हो गया है। उन्होंने बताया कि, भारतीय रेल में ओआरएन-2 का अर्थ, निरीक्षणों के दौरान पहचाने गए श्रेणी 2 के ऐसे पुल ढांचों को संदर्भित करता है, जो उनके रखरखाव या पुनर्स्थापन की आवश्यकता को दर्शाता है।

उन्होंने आगे बताया कि इस कार्य के तहत पुराने ब्रॉड गेज मेन लाइन (बीजीएमएल) लोडिंग गर्डर्स को हटाकर आधुनिक 25 टन वैल्डेड स्टील प्लेट गर्डर और एच-बीम स्टील स्लीपर लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त पुल के सब-स्ट्रक्चर (खंभों) की कंक्रीट जैकेटिंग की गई है। जिससे इसकी आयु और भार वहन क्षमता में वृद्धि हुई है। इस कार्य में 12 मार्च से 20 मार्च के बीच एक विशेष अभियान चलाकर सभी 08 स्पैनों को रिकॉर्ड समय में बदल दिया गया।

--ब्रिज संख्या 46ः 1953 के ढांचे का आधुनिक परिवर्तनपीआरओ ने बताया कि इसी क्रम में, चुनार-चोपन सेक्शन के ही 06 स्पैन वाले ब्रिज संख्या 46 का नवीनीकरण बीते फरवरी में पूरा किया गया। यह पुल भी 1953 के पुराने मानकों पर आधारित था, जिसके कारण इस पर ट्रेनों की गति को नियंत्रित करना पड़ता था। अब इस पुल में भी 25 टन वैल्डेड स्टील गर्डर स्थापित कर दिए गए हैं, जो भविष्य की भारी मालगाड़ियों और उच्च गति वाली यात्री ट्रेनों के लिए उपयुक्त हैं।

इन पुलों पर पहले संरक्षा कारणों से 30 किलोमीटर प्रति घंटा का स्थाई गति प्रतिबंध लागू था, जिसे अब समाप्त कर दिया जाएगा। 25 टन लोडिंग क्षमता वाले आधुनिक गर्डर्स से भारी मालगाड़ियों का परिचालन सुगम होगा, जिससे रेलवे के राजस्व और लॉजिस्टिक क्षमता में वृद्धि होगी। आधुनिक स्टील स्लीपर और जैकेटिंग तकनीक से पुलों की संरचनात्मक सुरक्षा अब अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है। इन कार्यों के साथ ही प्रयागराज मंडल अब ओआरएन-2 से पूरी तरह मुक्त हो गया है।

अंत में उन्होंने बताया, यह उपलब्धि रेल मंत्रालय के ‘मिशन रफ़्तार और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण’ के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने इस जटिल कार्य को सुरक्षा के साथ समय सीमा में पूरा करने वाले इंजीनियरों और श्रमिकों के टीम की सराहना की है। यह कार्य मंडल रेल प्रबंध रजनीश अग्रवाल के मार्गदर्शन में उप मुख्य ब्रिज इंजीनियर आईपीएस यादव और उनकी टीम ने मंडल के इंजीनियरिंग और परिचालन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग से पूरा किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र