पाठ्यक्रम में शहीदों का इतिहास हटाना दुर्भाग्यपूर्ण : डॉ. विनोद त्रिपाठी

 


कानपुर, 23 जुलाई (हि.स.)। नई पीढ़ी को देश के अमर शहीदों के संघर्ष और बलिदान के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए, लेकिन पाठ्यक्रम से उनके इतिहास को हटाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह बातें गुरुवार को शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर आयोजित राष्ट्रीय एकता सभा में मुख्य अतिथि साहित्यकार डॉ. विनोद त्रिपाठी ने कहीं।

चंद्रशेखर आजाद जनकल्याण समिति भारत के तत्वावधान में आज शहीद-ए-आजम चंद्रशेखर आजाद की जयंती आजाद वाटिका, चंद्रशेखर आजाद चौराहा पर राष्ट्रीय एकता सभा के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत आजाद की प्रतिमा का दूध, दही और गंगाजल से अभिषेक करने के बाद माल्यार्पण से हुई।

सभा की अध्यक्षता करते हुए समिति के संस्थापक अध्यक्ष सर्वेश कुमार पांडे 'निंनी' ने कहा कि सेनापति चंद्रशेखर आजाद ने अपने अदम्य साहस, पराक्रम और त्याग से स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। उनके व्यक्तित्व से प्रेरित होकर अनेक युवाओं ने क्रांतिकारी आंदोलन का मार्ग अपनाया और ब्रिटिश शासन को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि आजाद का जीवन आज भी युवाओं को अन्याय, भ्रष्टाचार और दमन के खिलाफ संघर्ष तथा राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

वक्ताओं ने कहा कि 23 जुलाई 1906 को जन्मे चंद्रशेखर आजाद ने कम उम्र में ही देश की आजादी के आंदोलन में भाग लिया और 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेजों से घिर जाने पर अंतिम गोली स्वयं को मारकर आजीवन आजाद रहने का अपना संकल्प निभाया।

कार्यक्रम का संचालन समिति के महामंत्री एवं मीडिया प्रभारी संदीप साहू ने किया। इस अवसर पर मनीषा वर्मा, भावना तिवारी, रवि दत्त मिश्रा, अनिल त्रिपाठी, ओम द्विवेदी, दीनानाथ द्विवेदी, विकास मल्होत्रा, प्रतिभा साहू, मोहम्मद उस्मान अली शाह, उमेश शुक्ला, सिद्धनाथ त्रिपाठी, राकेंद्र मोहन तिवारी, तिलकचंद कुरील, सी.के. सिंह, मुकेश मिश्रा, रजनी कश्यप, रामभूज पांडे, विजय गुप्ता, मनोज गुप्ता, श्याम मोहन तिवारी, प्रिंस गुप्ता, सुरेंद्र सिंह भदौरिया, दुर्गा बाजपेई, अरुण पाल, संतोष शर्मा, देवांश पांडे, रामजी अवस्थी, शानू गुप्ता, बी.डी. जायसवाल सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप