रवि काना की रिहाई का मामला: जेलर के बाद जेल अधीक्षक भी निलंबित
बांदा, 04 फ़रवरी (हि.स.)।
यूपी में नोएडा के कुख्यात स्क्रैप माफिया व गैंगस्टर रविंद्र नागर उर्फ रवि काना की बिना वैध न्यायिक आदेश के जिला कारागार बांदा से रिहाई के मामले में शासन ने सख्त रुख अपनाया है। जेलर के निलंबन के पांच दिन बाद अब जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम को भी बुधवार शाम निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई विशेष सचिव कारागार अनीता वर्मा के आदेश पर की गई। निलंबन के साथ ही जेल अधीक्षक को कारागार मुख्यालय लखनऊ से संबद्ध कर दिया गया है।
बताते चलें कि कुख्यात गैंगस्टर रविंद्र नागर उर्फ रवि काना जो अगस्त 2024 में बांदा जेल में बंद था। जिसे बिना कोर्ट के आदेश के गुरुवार शाम करीब 6.39 बजे मंडल कारागार से रिहा कर दिया गया। इस रिहाई को लेकर गौतमबुद्ध नगर की सीजेएम अदालत ने गंभीर आपत्ति जताते हुए सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने जेल अधीक्षक से स्पष्टीकरण तलब कर यह सवाल उठाया कि जब आरोपित के खिलाफ रंगदारी का मामला न्यायालय में विचाराधीन था, तो उसकी रिहाई किस आधार पर की गई।
मामले के सामने आने के बाद डीजी कारागार पीसी मीणा ने पहले जेलर विक्रम सिंह यादव को निलंबित कर दिया था। साथ ही रवि काना की दोबारा गिरफ्तारी के लिए नोएडा में कई पुलिस टीमें गठित की गई हैं। पूरे प्रकरण की प्रारंभिक जांच के लिए डीआईजी जेल प्रयागराज जोन राजेश श्रीवास्तव को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। डीआईजी रविवार शाम बांदा मंडल कारागार पहुंचे और रिहाई से जुड़े दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य साक्ष्यों को संकलित किया। इस दौरान उन्होंने जेल अधीक्षक का लिखित बयान भी अपने साथ लिया। संभवत: जांच रिपोर्ट डीजी कारागार को सौंपे जाने के बाद ही विशेष सचिव कारागार ने जेल अधीक्षक अनिल कुमार गौतम के निलंबन का आदेश जारी किया।
इसके पहले मंगलवार को जेल अधीक्षक और निलंबित जेलर सहित पांच लोगों के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज कराया गया है और जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। 5 सदस्यीय एसआईटी ने जांच भी शुरू कर दी है। निलंबन की खुद निलंबित जेल अधीक्षक ने पुष्टि की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल सिंह