वैश्विक स्वास्थ्य के लिए मूक महामारी है एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस : प्रो. भट्ट

 
















गोरखपुर, 19 मार्च (हि.स.)। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के स्वास्थ्य एवं जीवन विज्ञान संकाय की तरफ से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “एएमआर-शील्ड 2026” का शुभारंभ गुरुवार को हुआ। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर हॉस्पिटल लखनऊ के निदेशक प्रो. एम.एल.बी. भट्ट ने कहा कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस वैश्विक स्वास्थ्य के लिए मूक महामारी है।

प्रो. भट्ट ने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक और अनुचित उपयोग के कारण सामान्य संक्रमणों का उपचार भी कठिन होता जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में विश्वभर में लगभग 50 लाख मौतें एएमआर से संबंधित रहीं, जबकि भविष्य में इसका आर्थिक प्रभाव 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की आशंका है। उन्होंने सूक्ष्मजीवों की व्यापकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पृथ्वी पर लगभग एक ट्रिलियन बैक्टीरिया प्रजातियां, लाखों फफूंद और करीब दस लाख वायरस मौजूद हैं, वहीं मानव शरीर में 40 से 50 ट्रिलियन सूक्ष्मजीव पाए जाते हैं, जो शरीर की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विशिष्ट अतिथि गुरु श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय के निदेशक कर्नल डॉ. हिमांशु दीक्षित ने कहा कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक उभरती हुई गंभीर चुनौती है। इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए अस्पताल स्तर पर सुदृढ़ संक्रमण नियंत्रण प्रणाली, स्वच्छता और एंटीबायोटिक दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों और संस्थानों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा व्यापक जागरूकता अभियान चलाने पर बल दिया, ताकि इस वैश्विक समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए एमजीयूजी के कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह ने कहा कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस से निपटने के लिए तर्कसंगत दवा लेखन, एंटीमाइक्रोबियल स्टूवर्डशिप तथा प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट की आवश्यकता है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में भाषा संबंधी बाधाओं को दूर करने तथा एएमआर के समाधान खोजने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और ‘भाषाणी’ जैसे सॉफ्टवेयर के उपयोग का उल्लेख किया। स्वागत संबोधन में कार्यक्रम के संयोजक प्रो. सुनील कुमार सिंह ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की गंभीरता को रेखांकित किया और बताया कि यह सम्मेलन विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर एएमआर की रोकथाम हेतु प्रभावी रणनीतियां विकसित करने तथा सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक सिद्ध होगा।

राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में ‘स्टूडेंट्स क्रॉनिकल’ मैगजीन (वॉल्यूम 1 एवं 2) तथा संगोष्ठी स्मारिका का विमोचन किया गया। कार्यक्रम के दौरान आयोजन सचिव डॉ. प्रेरणा आदिति ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जबकि सह-आयोजन सचिव डॉ. रश्मि शाही ने विशिष्ट अतिथि का अभिनंदन किया। उद्घाटन के बाद आयोजित तकनीकी सत्रों में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के विभिन्न आयामों पर गहन चर्चा हुई। तकनीकी सत्र-एक में प्रो. गोपाल नाथ एवं प्रो. दिनेश यादव ने संक्रमण नियंत्रण, एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण उपयोग और वर्तमान चुनौतियों पर प्रकाश डाला, जबकि तकनीकी सत्र- दो में डॉ. विजय त्रिपाठी और डॉ. गौरव राज द्विवेदी ने आधुनिक शोध, नई तकनीकों और एएमआर से निपटने की रणनीतियों पर अपने विचार साझा किए। वहीं पोस्टर प्रेजेंटेशन सत्र में युवा शोधकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसका मूल्यांकन डॉ. संजय भट्ट एवं सह-निर्णायक डॉ. गौरव राज द्विवेदी ने किया।

हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय