राष्ट्रकवि दिनकर की स्मृति में 24 से 26 अप्रैल तक लखनऊ में होगा ‘रश्मिरथी पर्व’

 


राष्ट्रचेतना और स्वाभिमान को नई ऊर्जा देगा ‘रश्मिरथी पर्व’ : जयवीर सिंह

लखनऊ, 22 अप्रैल (हि.स.)। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी कालजयी कृति रश्मिरथी के 75 वर्ष पूरे होने पर राजधानी लखनऊ में भव्य ‘रश्मिरथी पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है। 24 से 26 अप्रैल 2026 तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान (ज्यूपिटर हॉल) में होने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन से साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रचेतना का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बुधवार को लोकभवन में प्रेसवार्ता कर आयोजन के संबंध में जानकारी दी। मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश संस्कृति एवं पर्यटन विभाग और 'राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर न्यास, दिल्ली' के इस संयुक्त आयोजन में महान व्यक्तित्वों के जीवन और विचारों को मंच के माध्यम से जीवंत किया जाएगा। इसमें ‘रश्मिरथी’ के साथ-साथ स्वामी विवेकानंद, बाल गंगाधर तिलक और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन, संवाद और काव्य पर आधारित नाट्य मंचन एवं नृत्य नाटिकाएं प्रस्तुत की जाएंगी।

उन्होंने कहा कि इस भव्य आयोजन की विशेषता यह है कि इसमें देश के ख्यातिप्राप्त कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। मुंबई के प्रख्यात रंगकर्मी मुजीब खान के निर्देशन में नाट्य मंचन किया जाएगा, जबकि शिमला की प्रसिद्ध कथक कलाकार पूनम शर्मा के निर्देशन में ‘अटल स्वरांजलि’ नामक संगीतमय नृत्य नाटिका प्रस्तुत की जाएगी, जो श्रद्धेय अटल जी की चुनिंदा कविताओं पर आधारित होगी।

इसके अलावा लखनऊ के महाविद्यालयों एवं विद्यलयों के छात्रों को भी आमंत्रित किया जाएगा, ताकि वह देश के साहित्य एवं महान साहित्यकारों को करीब से समझ सकें। इस साहित्यिक आयोजन से छात्र अपने स्वाभिमान और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नींव को और मजबूत कर सकेंगे।

उन्होंने कहा राष्ट्रकवि दिनकर की रचनाएं भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौर में जन-जन के मन में जोश और स्वाभिमान का संचार करती थीं। उनकी ओजस्वी वाणी ने देशवासियों को आजादी के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी। स्वतंत्रता के बाद भी उन्होंने अपनी लेखनी से राष्ट्र निर्माण की दिशा में समाज को नई ऊर्जा और सोच प्रदान की।

पर्यटन मंत्री ने कहा दिनकर की प्रमुख कृतियों में ‘रश्मिरथी’, ‘हुंकार’, ‘कुरुक्षेत्र’, ‘उर्वशी’, ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ और ‘संस्कृति के चार अध्याय’ जैसी अमर रचनाएं शामिल हैं। अपने साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें साहित्य अकादमी, हिन्दी साहित्य सम्मेलन और भारतीय ज्ञानपीठ जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्होंने राज्यसभा सदस्य, भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति और भारत सरकार के प्रथम हिन्दी सलाहकार के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन