पुस्तक पढ़ने की प्रवृत्ति कम होना चिन्ताजनक : मनोजकांत

 




लखनऊ, 27 अप्रैल (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह क्षेत्र प्रचार प्रमुख मनोजकांत ने विद्यार्थियों में पुस्तकें पढ़ने की प्रवृत्ति कम होने पर चिन्ता व्यक्त की है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अच्छी पुस्तकें पढें और उनका उपयोग जीवन में करें।

मनोजकांत राष्ट्रधर्म कार्यालय राजेंद्र नगर लखनऊ में आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम ‘पुस्तक चर्चा’ में बोल रहे थे। साप्ताहिक परिचर्चा में उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ऐसी पुस्तकें पढ़ने पर ध्यान देना चाहिए जो बहुश्रुत और बहुपठित हों। पुस्तक पढ़ने के क्रम में उसमें प्रस्तुत विचारों की प्रासंगिकता वैश्विक, राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर परखना चाहिए।

पुस्तक चर्चा कार्यक्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. जितेन्द्र कुमार ने प्रसिद्ध विचारक और लेखक डॉ. मनमोहन वैद्य की पुस्तक ‘हम और यह विश्व’ पर विशेष रूप से अपने विचार प्रकट किये। उल्लेखनीय है कि डॉ. जितेन्द्र कुमार इस पुस्तक की समीक्षा प्रतिष्ठित और लोकप्रिय मासिक पत्रिका-राष्ट्रधर्म में लिख चुके हैं। डॉ. जितेन्द्र कुमार ने कहा कि यह पुस्तक भारतवर्ष की उस सूक्ष्म अवधारणा का विश्लेषण करती है, जिसे हमारे प्राचीन ऋषियों ने प्रतिपादित किया और जिसे पीढ़ियों ने पुष्पित-पल्लवित किया। प्रस्तुत पुस्तक में लेखक ने धर्म, स्वत्व, हिन्दुत्व और सनातन जैसे जटिल विषयों की परतों को बड़ी सहजता से खोला है।

डॉ. जितेन्द्र ने कहा कि ‘हम और यह विश्व’ इस मायने में अत्यधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि इसमें सम्पूर्ण विश्व में भारतीय दर्शन, विचार पद्धति और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विषयों को अत्यन्त स्पष्टता और निर्भीकता से रखा गया है। उल्लेखनीय है कि उक्त पुस्तक ऐसे लेखों का संग्रह है जो 2017 से 2025 के दौरान अलग-अलग समय पर लिखे गये तथा प्रमुख राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। पुस्तक को चार भागों में बाँटा गया है- संघ और समाज, भारत की आत्मा, असहिष्णुता का सच और प्रेरणा शाश्वत है।

राष्ट्रधर्म के निदेशक डॉ. ओमप्रकाश ने चर्चा शुरू होने से पहले विषय को सारगर्भित तरीके से रखा। प्रभारी निदेशक सर्वेशचन्द्र द्विवेदी ने आभार प्रकट किया। चर्चा में शरद मिश्र, आदर्श द्विवेदी, गरिमा मिश्रा, अमन दुबे व अन्य लोग उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / शिव सिंह