रंग दे बसंती : युवाओं ने कॉमिक्स के माध्यम से दिखाया नया उत्तर प्रदेश
उचित मंच से ही करें अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार का प्रयोग
दंगा, हिंसा या उपद्रव नहीं हो सकता किसी भी समस्या का समाधान
सहारनपुर, 13 अगस्त (हि.स.)। कला एवं संस्कृति के माध्यम से अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति देने वाले युवाओं का प्रदेशव्यापी अभियान ‘रंग दे बसंती’ दिन-प्रतिदिन नई ऊंचाइयां तय कर रहा है। अभियान के तहत गुरुवार को मुजफ्फरनगर में युवाओं ने समूह ने ‘बदलते उत्तर प्रदेश’ विषय को केंद्र में रखते हुए कॉमिक्स वितरण कार्यक्रम आयोजित किया। इन कॉमिक्स में युवाओं ने अराजकता के स्याह अंधेरे से निकल कर भयमुक्त और विकास उन्मुख उत्तर प्रदेश बनने की यात्रा उकेरने का प्रयास किया है।
पलायन से घर वापसी तक
इस कार्यक्रम में सम्मिलित युवाओं ने कॉमिक्स के माध्यम से एक ऐसे काल्पनिक युवक की कहानी को प्रदर्शित किया, जो वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर के सांप्रदायिक दंगों के चलते पलायन कर चुका था। लेकिन, प्रदेश में शासन व्यवस्था में परिवर्तन के बाद कानून-व्यवस्था का राज और सौहार्दपूर्ण वातावरण स्थापित होने पर वह युवक बदलाव का अहसास करता है और फिर घर वापसी भी करता है।
कागज पर उकेरी यूपी की स्याह यादें
कई युवाओं ने इस अवसर पर अपनी कल्पनाओं को कागज पर उकेरा। युवा कलाकारों ने उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 से पहले की भयाक्रांत व्यवस्था एवं युवाओं के भविष्य से होते खिलवाड़ को रेखांकित करने के साथ ही इसके बाद की बदली ठोस कानून व्यवस्था, भयमुक्त वातावरण, विकास उन्मुख कार्यक्रमों और युवाओं के लिए बनाई गई रोजगारपरक व्यवस्था को प्रदर्शित किया।
कैसे लौट रहे हैं प्रदेश में युवा
रंग दे बसंती के मंच पर युवाओं के इस समूह में शामिल रजत त्यागी ने अपनी कला का परिचय देते हुए प्रदेश में हुए सकारात्मक बदलाव का कॉमिक्स के माध्यम से संदेश दिया। उन्होंने मुजफ्फरनगर दंगों के साथ ही उस समय अन्य स्थानों पर बिगड़ी कानून व्यवस्था को कॉमिक्स में रेखांकित किया। उन्होंने यह भी बताने का प्रयास किया कि पूर्व में पलायन कर चुके युवा किस तरह वर्तमान में फिर से प्रदेश का रुख कर रहे हैं।
लोकतांत्रिक तरीके से खोजें भविष्य का मार्ग
युवा नमन त्यागी ने प्रदेश की वर्तमान व्यवस्था को केंद्रित करते हुए युवाओं से अपील की कि लोकतांत्रिक तरीके से अपने उज्जवल भविष्य के लिए सही मार्ग की तलाश करें तथा अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए उचित मंच पर ही अपनी अभिव्यक्ति के अधिकार का उपयोग करें। रचनात्मक माध्यम से अपने विचारों अथवा समस्याओं को रखने से समाधान होता है, साथ ही इससे शांति व्यवस्था और आमजन के लिए सौहार्दपूर्ण माहौल भी स्थापित होता है।
विरोध के लिए भी रचनात्मक माध्यम
निकुंज ने अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए संदेश दिया कि दंगा, हिंसा या उपद्रव किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने रंग दे बसंती मंच के माध्यम से देश-प्रदेश में यह संदेश देने का प्रयास किया कि विरोध व अभिव्यक्ति के लिए हम रचनात्मक माध्यमों का प्रयोग कर सकते हैं। उन्होंने वर्ष 2017 से पहले की उत्तर प्रदेश की स्थिति को भी प्रदर्शित किया और इसके बाद आए सकारात्मक परिवर्तन को भी अपने कॉमिक्स के माध्यम से पटल पर रखा।
हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा