रायबरेली में साकार हो रही अवध केसरी राणा बेनी माधव बक्श सिंह की विरासत, अंतिम चरण में पहुंचा स्मारक परिसर

 


लखनऊ, 12 अगस्त (हि.स.)। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक अवध केसरी राणा बेनी माधव बक्श सिंह के अद्वितीय साहस और बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए रायबरेली के सलोन में विकसित किया जा रहा भव्य स्मारक परिसर अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। सभागार, पुस्तकालय, गेस्ट हाउस, एम्फीथिएटर और आधुनिक लाइट एंड साउंड व्यवस्था से सुसज्जित यह परिसर न केवल स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को जीवंत करेगा, बल्कि क्षेत्र में सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन को भी नई पहचान देगा।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बुधवार को बताया कि, इस परियोजना के प्रथम चरण के अंतर्गत अवध केसरी राणा बेनी माधव बक्श सिंह की स्मृति में सभागार और पुस्तकालय का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। इस चरण के लिए 20.09 करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त की गई है और निर्माण कार्य अबतक 95 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। भवन का मुख्य ढांचा तैयार हो गया है, जबकि पुट्टी, पेंट, फॉल्स सीलिंग, वॉल पैनलिंग और पोर्च सहित अंतिम फिनिशिंग का कार्य तेजी से चल रहा है, जो इसी माह पूरा हो जाएगा।

परियोजना के द्वितीय चरण में स्मारक परिसर का और विस्तार किया जा रहा है। इस चरण के लिए 12 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है और निर्माण कार्य 65 प्रतिशत पूरा हो चुका है। रिटेनिंग वॉल और बाउंड्री वॉल का निर्माण पूरा हो गया है। गेस्ट हाउस के भूतल की स्लैब और प्रथम तल की शटरिंग का कार्य भी पूर्ण हो चुका है। इसके अलावा फाउंडेशन, ईएसएस एवं फायर रूम का निर्माण पूरा हो गया है, जबकि एम्फीथिएटर और अन्य संरचनाओं का निर्माण तथा फिनिशिंग का कार्य तेजी से जारी है।

स्मारक परिसर को आधुनिक स्वरूप देने के लिए लाइट एंड साउंड आधारित आंतरिक विकास कार्य भी किए जा रहे हैं। इस कार्य के लिए 4 करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त की गई है और अब तक 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। आधुनिक प्रकाश एवं ध्वनि तकनीक के माध्यम से राणा बेनी माधव बक्श सिंह के शौर्य, बलिदान और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे आगंतुकों को इतिहास का जीवंत अनुभव मिल सकेगा।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने बताया कि, 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक अवध केसरी राणा बेनी माधव बक्श सिंह रायबरेली के जगतपुर स्थित शंकरपुर रियासत के शासक और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सबसे प्रभावशाली क्रांतिकारी नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने अवध के तालुकेदारों और जमींदारों को एकजुट कर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सशक्त संघर्ष छेड़ा। जुलाई 1857 तक वे अवध के सबसे बड़े क्रांतिकारी नेता बन चुके थे। 28 जून 1857 को बाराबंकी के नवाबगंज में उन्होंने अंग्रेजी सेना को करारी शिकस्त दी और चिनहट की ऐतिहासिक लड़ाई में भी अपनी वीरता का परिचय दिया। नवंबर 1858 में गोविंदपुर भीरा में लगभग 10 हजार सैनिकों के साथ अंग्रेजों पर धावा बोलकर उन्होंने एक और महत्वपूर्ण विजय हासिल की। राणा बेनी माधव बक्श सिंह ने राष्ट्रभक्ति, साहस और बलिदान की ऐसी मिसाल कायम की, जिसकी गूंज आज भी अवध मां राना भयो मर्दाना जैसे लोकगीतों में सुनाई देती है।

उन्होंने बताया रायबरेली के सलोन में विकसित हो रहा अवध केसरी राणा बेनी माधव बक्श सिंह स्मारक परिसर उनकी इसी अमर विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगा। सभागार, पुस्तकालय, एम्फीथिएटर, आधुनिक लाइट एंड साउंड शो और अन्य सांस्कृतिक सुविधाओं से सुसज्जित यह परिसर न केवल 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को जीवंत करेगा, बल्कि युवाओं को राष्ट्रभक्ति और बलिदान की प्रेरणा भी देगा। साथ ही यह परियोजना रायबरेली को सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और विरासत पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन