रघुकुल रीत सदा चली आई प्राण जाई पर वचन न जाई...
मुरादाबाद, 13 अक्टूबर (हि.स.)। लाइनपार रामलीला मैदान में चल रही रामलीला में मंगलवार को राम राज्याभिषेक की घोषणा, राम वनवास और राजा दशरथ के प्राण त्यागने के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय से रामायण के इन महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत कर दिया। मंच पर एक ओर राम के राज्याभिषेक की तैयारियों से अयोध्या में उत्सव का माहौल दिखाई दिया, वहीं दूसरी ओर वनवास की घोषणा ने माहौल को गमगीन कर दिया।
मंचन के दौरान राजा दशरथ ने भगवान राम को अयोध्या का राजा बनाने की घोषणा की। राम के राज्याभिषेक की खबर से अयोध्यावासी प्रसन्न हो उठे। इसी दौरान राजा दशरथ से महारानी कैकेयी ने दो वरदानों के रूप में राम के लिए 14 वर्ष के वनवास और भरत के लिए राजगद्दी की मांग की। राजा दशरथ के बार-बार अनुनय-विनय करने पर भी रानी राजी नहीं होती है। वह अपने वचनों पर अडिग रहती है। वह राजा दशरथ से कहती है कि आपको परेशानी है तो अपने वरदान वापस ले लीजिए। इस पर राजा दशरथ ने कहा रघुकुल रीत सदा चली आई प्राण जाई पर वचन न जाई...। राजा दशरथ ने कहा हमारे वंश में परंपरा रही है कि कोई भी अपने वचनों से नहीं फिर सकता है। राजा दशरथ विलाप करते रह गए और राम लक्ष्मण और सीता वन को चले गए। राम के वनगमन के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। पुत्र वियोग में राजा दशरथ की व्याकुलता और उनके प्राण त्यागने के प्रसंग का भी मार्मिक मंचन किया गया।
रामलीला व्यवस्था में श्री रामलीला मैनेजिंग कमेटी (रजिस्टर्ड) मुरादाबाद के अध्यक्ष सुरेंद्र अग्रवाल, मंत्री मयंक बंसल, कोषाध्यक्ष अतुल अग्रवाल, संदीप बंसल, प्रदीप बंसल, रोबिन अग्रवाल, अंशुल अग्रवाल, रोहित बंसल लगे रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल