एम्स का बंद गेट नंबर-3 खोलने की मांग, डीएम कार्यालय पहुंचा सामाजिक संगठन
गोरखपुर, 11 सितंबर (हि.स.)। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर का गेट नंबर-3 पिछले कई महीनों से बंद होने का मामला अब जिला प्रशासन तक पहुंच गया है। गेट बंद होने के कारण मरीजों और उनके तीमारदारों को हो रही परेशानी को देखते हुए प्रताप वाहिनी सामाजिक संस्था ने इसे जनहित का मुद्दा बताते हुए गेट नंबर-3 को शीघ्र खुलवाने की मांग की है। संस्था के संस्थापक अध्यक्ष राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने शुक्रवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर सिटी मजिस्ट्रेट उत्कर्ष श्रीवास्तव को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के माध्यम से बताया गया कि एम्स गोरखपुर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें गंभीर मरीजों के साथ बुजुर्ग, महिलाएं और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी शामिल होते हैं। ऐसे में एम्स का गेट नंबर-3 लंबे समय से बंद रहने के कारण लोगों को अनावश्यक रूप से लंबा रास्ता तय कर गेट नंबर-2 की ओर से परिसर में प्रवेश करना पड़ रहा है।
संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि एम्स परिसर में केवल एक प्रमुख गेट से आवागमन होने के कारण कई बार वाहनों का दबाव बढ़ जाता है। इससे आसपास के मार्गों पर जाम की स्थिति उत्पन्न होती है और मरीजों तथा उनके परिजनों को काफी देर तक परेशानी झेलनी पड़ती है। विशेष रूप से गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस और निजी वाहनों के आवागमन में भी अनावश्यक विलंब होने की आशंका बनी रहती है।
राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि गेट नंबर-3 केवल आवागमन का एक अतिरिक्त रास्ता नहीं है, बल्कि हजारों मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रवेश मार्ग है। लंबे समय से इसके बंद रहने के कारण लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे उनका समय और ऊर्जा दोनों खर्च हो रहे हैं। गंभीर मरीजों के मामले में अस्पताल पहुंचने में होने वाली थोड़ी सी भी देरी परेशानी को और गंभीर बना सकती है।
ज्ञापन में जिलाधिकारी से मांग की गई कि जनहित को ध्यान में रखते हुए एम्स प्रशासन से समन्वय स्थापित कर गेट नंबर-3 को खुलवाने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाए। संस्था ने कहा कि यदि गेट को खोल दिया जाता है तो एम्स आने वाले मरीजों और तीमारदारों को काफी राहत मिलेगी। साथ ही मुख्य प्रवेश मार्ग पर वाहनों का दबाव कम होने से यातायात व्यवस्था में भी सुधार आने की संभावना है।
प्रताप वाहिनी सामाजिक संस्था ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द कार्रवाई की अपेक्षा की है। संस्था का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संस्थान में मरीजों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसे में प्रवेश और निकास के रास्तों को सुगम रखना जरूरी है, ताकि किसी मरीज को अस्पताल पहुंचने में अनावश्यक परेशानी या देरी का सामना न करना पड़े।
हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय