अब मेडिकल कॉलेजों में भी होंगे पोस्टमार्टम, सरकार ने जारी किए निर्देश
लखनऊ, 27 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में पोस्टमार्टम व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए सरकार ने राजकीय एवं निजी मेडिकल कॉलेजों को भी पोस्टमार्टम की अनुमति दी है। पोस्टमार्टम प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी एवं मानकीकृत बनाने के उद्देश्य से अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
उन्होंने सभी राजकीय चिकित्सालयों, चिकित्सा संस्थानों, राजकीय एवं स्वशासी मेडिकल कॉलेजों तथा निजी मेडिकल कॉलेजों को इन निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि इन दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में फॉरेंसिक चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा न्यायिक प्रक्रियाओं में भी पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।
जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रदेश में पोस्टमार्टम कार्य आधुनिक शव-विच्छेदन गृहों में ही संपन्न कराया जाएगा तथा फॉरेंसिक मेडिसिन के पठन-पाठन को सुदृढ़ करने हेतु चिकित्सा शिक्षकों एवं रेजिडेंट चिकित्सकों को शव-विच्छेदन प्रक्रिया में सम्मिलित किया जाएगा। इसके अंतर्गत मानकीकृत एवं गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं से युक्त निजी मेडिकल कॉलेजों में भी, शासनादेशों की शर्तों के अधीन, पोस्टमार्टम के दौरान शिक्षण गतिविधियों को अनुमति दी जाएगी।
यह भी सुनिश्चित किया गया है कि निजी मेडिकल कॉलेजों को केवल “उत्तर प्रदेश शरीर रचना परीक्षण अधिनियम-1956” के प्रावधानों के अनुरूप लावारिस शव ही उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही, राजकीय एवं स्वशासी चिकित्सा संस्थानों में सभी प्रकार के शव परीक्षण चिकित्सा शिक्षकों एवं रेजिडेंट्स की सहभागिता से किए जा सकेंगे।
इन चिकित्सा संस्थानों में भी होंगे शव-विच्छेदन कार्य
प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों जैसे केजीएमयू लखनऊ, लोहिया संस्थान लखनऊ, एसजीपीजीआई लखनऊ, सैफई आयुर्विज्ञान संस्थान (इटावा) सहित अन्य राज्य स्तरीय संस्थानों में, जहां फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग स्थापित है, वहां भी शव-विच्छेदन कार्य संबंधित विभागों द्वारा संपन्न कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार के अधीन उत्तर प्रदेश में स्थित संस्थान जैसे बीएचयू वाराणसी, एएमयू अलीगढ़, एम्स गोरखपुर एवं एम्स रायबरेली में भी उपलब्ध फॉरेंसिक विभागों के माध्यम से पोस्टमार्टम कार्य कराए जा सकेंगे।
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि पोस्टमार्टम का समस्त कार्य पूर्व की भांति यू.पी. मेडिकल मैनुअल में निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार संबंधित जनपद के मुख्य चिकित्साधिकारी की देखरेख में किया जाएगा। जिन मेडिकल कॉलेजों में नियमित फॉरेंसिक संकाय उपलब्ध है, वहां पोस्टमार्टम की जिम्मेदारी संबंधित विभाग के शिक्षकों को सौंपी जाएगी तथा न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत करने का दायित्व भी उन्हीं का होगा।
जिन जनपदों में मेडिकल कॉलेज अथवा पोस्टमार्टम हाउस उपलब्ध हैं, वहां जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक जिला स्तरीय समिति गठित की जाएगी। यह समिति थानों का आवंटन सुनिश्चित करेगी, जिससे शवों को बिना किसी भ्रम के संबंधित संस्थानों तक सीधे भेजा जा सके।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन