प्रधानमंत्री की अपील का असर: रसोई गैस की बचत के लिए गांवों में लौटी लकड़ी की परम्परा
फतेहपुर, 20 मई (हि.स.)। उत्तर के फतेहपुर जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रसोई गैस के उपयोग कम करने की अपील का असर दिखने लगा है। लोग भोजन बनाने के लिए ईंधन के पारम्परिक स्रोत लकड़ी के उपयोग की तरफ लौटते दिखाई दिए।
देश के प्रधानमंत्री की अपील का असर अब गांव से लेकर शहर तक दिखने लगा है। विदेश यात्रा कम करने और अनावश्यक सोना नहीं खरीदने की भी सलाह दी है। लोग ईंधन बचाने के लिए वैकल्पिक उपाय अपनाने लगे हैं। इसका जीवंत नजारा फतेहपुर के असोथर कस्बे में देखने को मिला।
नगर पंचायत असोथर के किला वार्ड निवासी वरिष्ठ महिला कमला देवी पत्नी माताबदल असोथर ब्लॉक मुख्यालय परिसर में सूखी पड़ी लकड़ियों का गट्ठर बांधकर उसे घर पहुंचाने के लिए अपने बेटे रामबहादुर, फतेहबहादुर का इंतजार कर रही हैं। कमला देवी गैस की बढ़ती कीमत और सिलेंडर की अनियमित आपूर्ति से परेशान होकर फिर से लकड़ी के चूल्हे का इंतजाम करती दिखीं हैं।
उन्होंने बताया कि गैस महंगी है और हर बार समय पर मिलती नहीं। लकड़ी से खाना बनाने में मेहनत तो है, लेकिन पैसे की बचत होती है। प्रधानमंत्री ने भी बचत करने की सलाह दी है। असोथर, रामनगर कौहन, जरौली सहित कई इलाकों में अब महिलाएं सुबह-शाम लकड़ी-कंडे इकट्ठा करने में लगी रहती हैं। बुजुर्ग महिलाओं का कहना है कि पहले भी चूल्हे पर ही खाना बनता था, इसलिए लकड़ी से भोजन बनाना कोई परेशानी की बात नहीं।
हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र कुमार