हिमाचल के लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का किया निर्वहन : प्रो. एस. विक्टर बाबू

 




लखनऊ, 15 अप्रैल(हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को 'हिमाचल प्रदेश दिवस' के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में किया गया।

मुख्य अतिथि डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लोग सांस्कृतिक रूप से अत्यंत समृद्ध, सरल एवं सौम्य स्वभाव के होते हैं। उन्होंने बताया कि यहां की लोक परंपराएं, रीति-रिवाज, लोकगीत एवं नृत्य न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखते हैं, बल्कि समाज में एकता और सद्भाव को भी सुदृढ़ करते हैं।

प्रो. बाबू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी अपनी वीरता, समर्पण और प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। साथ ही उन्होंने हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता की प्रशंसा करते हुए कहा कि हरे-भरे वन एवं पहाड़, स्वच्छ नदियां और शांत वातावरण इसे अत्यंत मनमोहक एवं आकर्षक बनाते हैं, जो न केवल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है, बल्कि इसे भारत के सबसे खूबसूरत राज्यों में भी स्थान दिलाता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने सभी को हिमाचल प्रदेश दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन हम सभी को देश के विभिन्न राज्यों की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देवताओं की भूमि है और यह दिवस केवल एक राज्य के गठन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह वहां की अद्भुत सांस्कृतिक विरासत, लोकजीवन, लोकगीत-नृत्य और प्रकृति के प्रति गहरे लगाव को सम्मान देने का भी अवसर है।

उन्होंने हिमाचल की सादगी, भाईचारे और पर्यावरण के प्रति जागरूक जीवनशैली की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और सांस्कृतिक विविधता के कारण पूरे देश में विशेष स्थान रखता है। प्रो. मित्तल ने आगे कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में न केवल सांस्कृतिक समझ को बढ़ाते हैं, बल्कि राष्ट्रीय एकता, आपसी सम्मान और 'विविधता में एकता' की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं।

सीएसआईआर- भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान के सीनियर साइंटिस्ट संदीप शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि हिमाचल प्रदेश केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों के दृष्टिकोण से भी अत्यंत समृद्ध राज्य है। उन्होंने कहा कि यहां की परंपराएं, लोकजीवन और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना हमें सादगी, संतुलन और सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देती है। उन्होंने हिमाचल के पर्व-त्योहारों, लोककला और सामुदायिक जीवन की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि यह प्रदेश अपनी विशिष्ट पहचान के साथ देश की सांस्कृतिक विविधता को और अधिक समृद्ध करता है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्‍द्र पाण्डेय