सपा के पाप का घड़ा भरा, 34 साल में काम नहीं गेस्ट हाउस जैसे कांड ज्यादा : पंकज चौधरी

 


लखनऊ, 04 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने रविवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में कहा कि उत्तर प्रदेश में सपा के कार्यकाल को देखें तो काम कम और कांड-कारनामे ज्यादा नजर आते हैं। उन्होंने कहा सपा के कुशासन में उत्तर प्रदेश ने जो दंश झेला है, उसका एक-एक हिसाब अब बेनकाब हो चुका है।

प्रेस वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सपा के 34 साल के काले कारनामों, अकूत घोटालों, बेलगाम गुंडागर्दी और परिवारवाद का कच्चा चिट्ठा जनता के सामने रखा। भाजपा नेताओं ने प्रतीक रूप में 'सपा के पाप का घड़ा' फोड़कर यह स्पष्ट संदेश दिया कि आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जागरूक जनता अपने वोट की चोट से सपा के इन 34 सालों के पापों का अंतिम हिसाब करेगी।

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि वर्ष 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड की घटना भी सपा की राजनीतिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि 2012 में अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद सत्ता का केंद्र परिवार के भीतर रहा। डिंपल यादव को निर्विरोध निर्वाचित कराने के लिए उनके प्रतिद्वंद्वियों को कथित धमकी दिए जाने, मुख्यमंत्री द्वारा लगभग 50 विभाग अपने पास रखने तथा बिजली आपूर्ति में चुनिंदा वीआईपी जिलों को प्राथमिकता दिए जाने जैसे मुद्दों ने तत्कालीन सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।

2013 के मुजफ्फरनगर दंगों का उल्लेख करते हुए चौधरी ने तत्कालीन मंत्री आजम खान पर अधिकारियों के कामकाज में हस्तक्षेप और एक विशेष वर्ग के लोगों को बचाने पर कहा कि इस हिंसा में 60 से अधिक लोगों की मौत और 50 हजार से अधिक लोगों के विस्थापन की बात सामने आई । साथ ही सहारनपुर दंगे में तत्कालीन सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए।

भाजपा अध्यक्ष चौधरी ने 72,825 शिक्षक भर्ती, 2015-16 में दलित उत्पीड़न के मामलों और 2016 के जल निगम भर्ती प्रकरण पर सपा सरकार में सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता और प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठे साथ ही युवाओं के अधिकारों और अवसरों के साथ अन्याय के आरोपों ने तत्कालीन व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि 2016 में मुख्तार अंसारी से जुड़ी पार्टी के साथ गठबंधन की कोशिश, 2014 में यादव परिवार के सदस्यों का सपा के पांचों लोकसभा सीटों पर निर्वाचित होना और 2017 में कांग्रेस के साथ गठबंधन सपा की राजनीति में परिवारवाद और अवसरवादी गठजोड़ को दर्शाता है।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन