पांचाल भूमि के पौराणिक व ऐतिहासिक स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाना जरूरी : 'पांचाल शोध एवं विकास समिति
-फर्रूखाबाद में पर्यटन को लगेंगे नए पंख: नीम करोरी से लेकर ODOP और इको-टूरिज्म तक की तैयारी
फर्रूखाबाद, 27 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद फर्रूखाबाद में विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर पांचाल शोध एवं विकास समिति ने बेवर रोड स्थित संध्या पैलेस में जनपद के समृद्ध पर्यटन एवं ऐतिहासिक धरोहरों पर केंद्रित गोष्ठी आयाेजित की। इसमें वक्ताओं ने जिले के प्रसिद्ध धार्मिक व ऐतिहासिक स्थलों के विकास तथा पर्यटन विभाग द्वारा किए जा रहे सराहनीय प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की।
गोष्ठी के अध्यक्ष संस्था के अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह सोमवंशी ने कहा कि पांचाल की यह पवित्र भूमि अनूठा इतिहास समेटे हुए है। उन्होंने जनपद के पर्यटन ढाँचे को मजबूत करने और इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए पर्यटन विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न विकास योजनाओं की सराहना की। भूपेंद्र प्रताप सिंह ने फर्रूखाबाद के प्रमुख पर्यटन केंद्रों—बाबा नीब करोरी धाम (नीम करोरी), बौद्ध स्थली संकिसा, महाभारत कालीन पौराणिक नगरी कम्पिल तथा महर्षि श्रृंगी ऋषि की तपोस्थली श्रृंगीरामपुर के सौंदर्यीकरण, जीर्णोद्धार और श्रद्धालुओं के लिए नागरिक सुविधाएं बढ़ाने में पर्यटन विभाग के योगदान को रेखांकित किया।
गाेष्ठी में सुझाव दिया गया कि कृषि व पर्यावरण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए फर्रूखाबाद की प्रमुख नर्सरियों को टूरिज्म सर्किट से जोड़ा जाए। इससे बाहर से आने वाले पर्यटकों को न केवल स्थानीय हस्तशिल्प और कृषि उत्पादों को करीब से देखने-खरीदने का अवसर मिलेगा, बल्कि 'नर्सरी भ्रमण' के माध्यम से प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनका रुझान भी बढ़ेगा। इस अवसर पर भानु प्रकाश मिश्रा, अनिल प्रताप सिंह, एम.आर. पाल, कैप्टन डी.एस. राठौर, डॉ. मुकेश सिंह राठौर, भूपेंद्र प्रताप सिंह, शरद चंदेल, आकिब खां, राजीव बाजपेयी, अनिल ददुआ, सत्यपाल सिंह, के के वर्मा, प्रदीप कुमार, अनिल सिंह प्रधानाचार्य आदि उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / चंद्रपाल सिंह सेंगर