पैक्ड पानी पर सख्ती, बीआईएस प्रमाणन के बिना नहीं मिलेगा लाइसेंस : एफएसडीए
लखनऊ, 14 अक्टूबर (हि.स.)। बोतल बंद पानी की शुद्धता को लेकर उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश में नई इकाइयों को भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का प्रमाणन मिलने के बाद ही राज्य में खाद्य सुरक्षा लाइसेंस या पंजीकरण जारी किया जाएगा। पहले से संचालित सभी इकाइयों को 31 मार्च 2027 तक प्रमाणन प्राप्त करना होगा। तय समयसीमा तक प्रमाणन नहीं लेने वाली इकाइयों का लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित रहेगा और उत्पादन बंद रहेगा।
जनस्वास्थ्य को सर्वाेपरि रखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने बुधवार काे यह आदेश जारी किया है। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश की सीमा में तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। प्रदेश में संचालित केंद्रीय लाइसेंस प्राप्त विनिर्माण इकाइयां भी इसके दायरे में होंगी। आदेश का सीधा संदेश है कि पैक्ड पानी के उत्पादन और कारोबार में गुणवत्ता मानकों का अनुपालन अब केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि लाइसेंस और उत्पादन जारी रखने की अनिवार्य शर्त होगा। अब प्रदेश की सभी संबंधित इकाइयों को निर्धारित समयसीमा के भीतर बीआईएस प्रमाणन हासिल करना होगा।
एफएसडीए ने कसा शिकंजा
दरअसल, एफएसडीए ने पिछले एक वर्ष के दौरान प्रदेश की 811 पैक्ड पेयजल और पैक्ड मिनरल वॉटर विनिर्माण इकाइयों का निरीक्षण कर प्रवर्तन कार्रवाई की। प्रदेश में पैक्ड पेयजल और पैक्ड मिनरल वॉटर की विनिर्माण इकाइयों से लिए गए 660 नमूनों में 176 स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित और 337 अधोमानक मिले। आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन डॉ रोशन जैकब के अनुसार, पैक्ड पेयजल का कारोबार उपभोक्ता के उस भरोसे पर टिका है, जिसके तहत वह पानी की शुद्धता और सुरक्षा सुनिश्चित मानकर कीमत चुकाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन