जैविक खेती को समृद्धि का आधार बना रहे अन्नदाता
गोरखपुर, 08 सितंबर (हि.स.)। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के महंगे खर्च और इनके इस्तेमाल से मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति से परेशान अन्नदाता किसान अब प्राकृतिक व जैविक खेती को अपनी समृद्धि का नया आधार बना रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही प्रोत्साहनपरक योजनाओं के चलते जैविक खेती की तरफ किसानों का रुझान तेजी से बढ़ा है।
कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. धनंजय सिंह बताते हैं कि सरकार की परंपरागत कृषि विकास योजना और नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग से जैविक/प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों का आकर्षण बढ़ रहा है। पारंपरिक खेती की तुलना में जैविक खेती को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाने के लिए योगी सरकार क्लस्टर आधारित मॉडल पर जोर दे रही है। योजना के तहत 20 से 50 हेक्टेयर का क्लस्टर बनाकर जैविक विधि अपनाने वाले किसान समूहों को सरकार की ओर से अनुदान और तकनीकी सहायता दी जाती है।
क्लस्टर से जुड़े किसानों को प्रमाणित जैविक खाद, बीज और वर्मी कंपोस्ट यूनिट के लिए आर्थिक मदद मिलती है। सरकार की ओर से जैविक प्रमाणीकरण (सर्टिफिकेशन) की प्रक्रिया को नि:शुल्क या बेहद रियायती दरों पर सुलभ कराया गया है, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में कोई अड़चन न आए।
जैविक खेती को बढावा देने के क्रम में सरकार नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के अंतर्गत पंजीकृत किसानों को रबी और खरीफ के सीजन में प्रति एकड़ 2000 रुपये प्रोत्साहन राशि देती है। गोरखपुर में 12500 किसानों को इस मिशन का लाभ मिल चुका है। जबकि परंपरागत कृषि विकास योजना (क्लस्टर आधारित) के तहत किसानों को डीबीटी के माध्यम से जैविक बीज, हरी खाद, लिक्विड बायो फर्टिलाइजर आदि के लिए कुल मिलाकर प्रति एकड़ 3600 रुपये या 9000 रुपये प्रति किसान की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाती है। परंपरागत कृषि विकास योजना के जरिये गोरखपुर के 400 किसान लाभान्वित हो चुके हैं।
क्लस्टर बनाकर जैविक खेती कराने वाले ब्रह्मपुर ब्लॉक के आकिब जावेद फार्मर्स प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (एफपीओ) के संचालक आकिब जावेद बताते हैं कि सरकार के प्रयासों से किसान पुराने दौर की तरह रसायनमुक्त जैविक खेती की तरफ बढ़े हैं। बाजार से यूरिया या डीएपी खरीदने की बजाय किसान स्थानीय स्तर पर ही जीवामृत, घनजीवामृत और नीम-आधारित कीटनाशक खुद तैयार कर रहे हैं। इससे फसल की उत्पादन लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक की भारी कमी दर्ज की गई है। दूसरी तरफ स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता से जैविक उत्पाद अच्छे दाम पर हाथोंहाथ बिक जाते हैं। सरकार से मिलने वाला प्रोत्साहन बोनस जैसा हो जाता है।
जैविक खेती में सब्जियों के उत्पादन पर किसानों का अधिक ध्यान
जैविक खेती अपनाने वाले किसानों का मुख्य सब्जियों के उत्पादन पर है। कम समय में तैयार होने वाली नकदी फसल होने के कारण सब्जियां किसानों को नियमित आमदनी देती हैं। आकिब जावेद बताते हैं कि ब्रह्मपुर के किसान बड़े पैमाने पर सब्जियों की जैविक खेती कर रहे हैं। इस खेती में रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर फेरोमोन ट्रैप, ट्राइकोडर्मा और जैविक घोल का उपयोग किया जा रहा है, जिससे सब्जियों की पौष्टिकता और स्वाद दोनों बरकरार रहते हैं। हाल के कुछ सालों में शहरी बाजारों में जैविक सब्जियों की मांग तेजी से बढ़ी है। इन सब्जियों के दाम सामान्य फसलों के मुकाबले 25 से 35 प्रतिशत तक अधिक मिल रहे हैं। कम लागत और ऊंचे बिक्री मूल्य के इस तालमेल ने किसानों की शुद्ध आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है।
हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय