मुहर्रम पर मातमी जुलूस में गूंजी या हुसैन की सदाएं, फातमान में ठंडा किए गए ताजिया
वाराणसी। मुहर्रम के अवसर पर वाराणसी में मातमी माहौल और अकीदत का अनूठा संगम देखने को मिला। शहर के विभिन्न इलाकों से निकली ताजियाएं पारंपरिक मार्गों से होते हुए फातमान पहुंचीं, जहां 'ताजिया ठंडी' की ऐतिहासिक रस्म अदा की गई। पूरे आयोजन के दौरान कमिश्नरेट पुलिस सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरी तरह सतर्क और मुस्तैद रही।
हुकुलगंज, नदेसर, तेलियाबाग, मदनपुर, नई सड़क, दालमंडी और मंडुवाडीह समेत शहर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में अकीदतमंद ताजिए लेकर निकले। मातमी जुलूस के दौरान "या हुसैन" और "हुसैन-हुसैन" की सदाओं से पूरा वातावरण गूंज उठा। श्रद्धालु पूरे सम्मान और अनुशासन के साथ जुलूस में शामिल हुए और इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए मातम मनाया।
ताजिया ठंडी करने की रस्म मोहर्रम की सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक मानी जाती है। दसवीं मोहर्रम को कर्बला की जंग में इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में निकाले गए ताजिए निर्धारित मार्गों से होकर कर्बला स्थल पहुंचते हैं, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक अथवा प्रतीकात्मक रूप से ठंडा किया जाता है। यह रस्म सत्य, इंसाफ और कुर्बानी के संदेश का प्रतीक मानी जाती है।
शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल की विशेष तैनाती की गई थी। अधिकारी लगातार जुलूस मार्गों का निरीक्षण करते रहे और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए रखी। प्रशासन की सतर्कता और लोगों के सहयोग से पूरे आयोजन का संपन्न होना सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बना।