दूरियां कितनी भी हों दिल पास होना चाहिए....

 


मुरादाबाद, 04 अक्टूबर। साहित्यिक संस्था हिन्दी साहित्य संगम के तत्वावधान में रविवार शाम को मिलन विहार मुरादाबाद स्थित आकांक्षा विद्यापीठ इण्टर कॉलेज में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। काव्य पाठ करते हुए नकुल त्यागी ने सुनाया- मुलाकात चाहें ना हो, अहसास होना चाहिए। अपनेपन को रखने का प्रयास होना चाहिए। भागदौड़ की जिंदगी यूँ ही कर लो बन्दगी, दूरियाँ कितनी भी हों दिल पास होना चाहिए।

नकुल त्यागी ने माॅं शारदे की वन्दना प्रस्तुत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता ओंकार सिंह 'ओंकार' ने की, मुख्य अतिथि के रूप में डाॅ. चिरंजी लाल 'चंचल' तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में रघुराज सिंह निश्चल उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन संस्था के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नकुल त्यागी द्वारा किया गया।

रघुराज सिंह 'निश्चल' ने सुनाया- नेकी कर दरिया में डालो। जीवन का सिद्धांत बना लो॥ अशोक बाबा ने कहा- गाँधी मेरे देश का देख ऐसा हाल है। पेट-पेट सूखा चेहरा-चेहरा सवाल है। डॉ चिरंजीलाल 'चंचल' ने सुनाया-करें कोशिश भले जुगनू, सितारे हो नहीं सकते॥ सहारा ढूँढने वाले, सहारे हो नहीं सकते॥ है हिम्मत तो निकल बाहर आ, माथे की लकीरों से॥ कभी विचलित नहीं होगा, जो हैं सच्ची नजीरों से।

मंगू सिंह ने कहा- आओ देश में घोषणा कर दो, अब देश में भ्रष्टाचार न होगा। रिश्वत कोई नहीं माँगेगा, बिना लिए कोई काम न होगा। ओंकार सिंह 'ओंकार' ने सुनाया- मेरे भारत में, सबसे बात निराली है, धरा यहाँ की अन्न उगाती भरती भोजन थाली है।

डॉ. महेश दिवाकर ने सुनाया- राम-नाम को हृदय बसालो, रहे नहीं अवरोध कोई! सब रहें परिवार साथ में, हो तो जीत सदा झिलमिल है।

इस अवसर पर पुलक त्यागी और शलभ शर्मा आदि लोग भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में संस्था के अध्यक्ष ओंकार सिंह 'ओंकार' द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल