प्रभावी कानून होने के बावजूद दहेज हत्या की घटनाएं चिंताजनक : विजया रहाटकर
कानपुर, 09 जुलाई (हि.स.)। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा से जुड़े गंभीर मामलों में किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। दहेज उत्पीड़न, महिला हिंसा और यौन अपराधों में त्वरित एवं कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यह बातें गुरुवार को राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहीं।
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर की अध्यक्षता में सर्किट हाउस के नवीन सभागार में आयोजित ‘राष्ट्रीय महिला आयोग आपके द्वार’ जनसुनवाई कार्यक्रम में महिलाओं से संबंधित कुल 61 प्रकरणों की सुनवाई की गई। इनमें 40 मामले पहले से आयोग में लंबित थे, जबकि आयोग के कानपुर आगमन पर 21 नई शिकायतें भी प्राप्त हुईं। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान, संयुक्त पुलिस आयुक्त संकल्प शर्मा, अपर जिलाधिकारी विवेक चतुर्वेदी सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
मीडिया से बातचीत में विजया रहाटकर ने बताया कि अधिकांश शिकायतें पारिवारिक विवाद, पति-पत्नी के बीच मतभेद और महिलाओं के उत्पीड़न से जुड़ी थीं। उन्होंने कहा कि कई महिलाएं सामाजिक और पारिवारिक दबाव के कारण लंबे समय तक अत्याचार सहती रहती हैं, इसलिए ऐसे मामलों में समयबद्ध न्याय और राहत मिलना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि जनसुनवाई में यौन उत्पीड़न और साइबर अपराध के मामले भी सामने आए। एक गंभीर मामले में परिवार की ओर से समझौते का प्रयास किया गया, जिसे आयोग ने अस्वीकार कर पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। वहीं, लंबे समय से लंबित एक अन्य मामले में महिला के साथ लगातार मारपीट और उत्पीड़न की शिकायत पर भी आरोपित के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने दहेज उत्पीड़न और दहेज हत्या की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रभावी कानून होने के बावजूद ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने बताया कि हाल के कुछ गंभीर मामलों में आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित राज्यों की पुलिस को आरोपितों की शीघ्र गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच, कठोर कार्रवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग भोपाल और गाजियाबाद सहित कई मामलों की निगरानी भी कर रहा है।
विजया रहाटकर ने कहा कि आयोग के पास हर वर्ष बड़ी संख्या में शिकायतें आती हैं, जिनके निस्तारण में पुलिस रिपोर्ट और विभिन्न विभागों से समन्वय के कारण समय लगता है। इसी चुनौती को देखते हुए आयोग ने राज्यों और जिलों में पहुंचकर प्रत्यक्ष जनसुनवाई शुरू की है। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में देशभर में 225 से अधिक जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, ताकि महिलाओं को उनके क्षेत्र में ही त्वरित सुनवाई और न्याय मिल सके।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप