तकनीक सक्षम होंगे शिक्षक, 05 जनपदों में ‘निपुण शिक्षक सारथी’ पायलट मॉडल शुरू
लखनऊ, 16 अप्रैल (हि.स.)। निपुण भारत मिशन को जमीनी स्तर पर परिणामोन्मुख बनाने के लिए योगी सरकार ने ‘निपुण शिक्षक सारथी’ कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में तकनीक आधारित ठोस पहल शुरू की है। अब निपुण लक्ष्य की दिशा में बदलाव के असली नेतृत्वकर्ता शिक्षक बनेंगे। पायलट आधार पर चित्रकूट, सोनभद्र, बलरामपुर, गोरखपुर और सीतापुर जनपदों में लागू किया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को ‘बदलाव के असली सारथी’ के रूप में तैयार करने का कार्य शुरू किया है। चयनित 15 एसआरजी के दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को 15-16 अप्रैल को पूरा कर लिया गया। इसके लागू होने से परिषदीय शिक्षक पारंपरिक भूमिका से आगे बढ़कर तकनीक सक्षम होंगे।
इन पांच जनपदों में लागू हुआ पायलट मॉडल
कार्यक्रम को चित्रकूट, सोनभद्र, बलरामपुर, गोरखपुर और सीतापुर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है। इनमें चित्रकूट, सोनभद्र और बलरामपुर आकांक्षी जनपद हैं, जबकि गोरखपुर और सीतापुर में आकांक्षी विकासखंड शामिल हैं। इन क्षेत्रों में शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से इस मॉडल को प्राथमिकता दी गई है।
विभाग द्वारा प्रशिक्षित 15 एसआरजी देंगे मार्गदर्शन
इस कार्यक्रम के अंतर्गत 15 राज्य स्तरीय संदर्भ समूह (एसआरजी) को विभाग द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। यह प्रशिक्षित एसआरजी तकनीक के माध्यम से अधिकाधिक शिक्षकों से जुड़कर उन्हें निरंतर शैक्षणिक मार्गदर्शन प्रदान करेंगे और कक्षा में आने वाली समस्याओं के समाधान में सहयोग देंगे।
संवाद की नई व्यवस्था, बढ़ेगा शिक्षण सहयोग
इस मॉडल के अन्तर्गत शिक्षकों के साथ संवाद और सहयोग की आवृत्ति में बड़ा बदलाव लाया गया है। जहां पहले औसतन प्रतिदिन 01 से 02 बार टेक्निकल टीम से संपर्क हो पाता था, वहीं अब 18 से 20 बार नियमित और योजनाबद्ध शैक्षणिक संवाद सुनिश्चित किए जाएंगे। इससे शिक्षकों को अधिक लक्षित और आवश्यकता आधारित मार्गदर्शन मिलेगा।
कक्षा 02 के सीखने के परिणामों पर विशेष फोकस
कार्यक्रम के अंतर्गत कक्षा 02 के शिक्षकों को भाषा और गणित की बुनियादी दक्षताओं को सुदृढ़ करने के लिए अतिरिक्त सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इससे प्रारंभिक स्तर पर ही छात्रों की सीखने की मजबूत नींव तैयार होगी और आगे के शैक्षणिक परिणाम बेहतर होंगे।
डिजिटल मॉडल से समय और लागत में कमी
राज्य सरकार के प्रवक्ता के अनुसार यह तकनीक आधारित व्यवस्था फील्ड विजिट पर निर्भरता को कम करेगी, जिससे समय और लागत दोनों में कमी आएगी। साथ ही दूरस्थ क्षेत्रों के शिक्षकों तक भी नियमित रूप से पहुंच सुनिश्चित हो सकेगी। इसके अलावा कार्यक्रम के अंतर्गत उन विद्यालयों और शिक्षकों को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां शैक्षणिक सहयोग सीमित है या विभिन्न आकलनों में प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर पाया गया है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में संतुलित सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन