चुनावों में महिलाओं की हिस्सेदारी ने भारतीय लोकतंत्र को अधिक सहभागितापूर्ण बनाया : प्रो. संजय कुमार
प्रयागराज, 16 मार्च (हि.स)। ईश्वर शरण पीजी कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा सोमवार को ‘‘भारतीय चुनावों की नई प्रवृत्तियां’’ विषय पर व्याख्यान हुआ। जिसमें विकासशील समाज अध्ययन पी, (सीएसडीएस) नई दिल्ली के पूर्व निदेशक और देश के जाने माने चुनाव विश्लेषक प्रो. संजय कुमार ने कहा कि चुनावों में महिलाओं की बढ़ती हुई हिस्सेदारी ने भारतीय लोकतंत्र को अधिक सहभागितापूर्ण बनाया है।
उन्होंने बताया कि पिछले कई दशकों के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बढ़ता हुआ महिला मतदान प्रतिशत महिलाओं की राजनीति में सक्रिय और बढ़ती हुई हिस्सेदारी का प्रतीक है। उनके अनुसार इस दौरान पुरुषों के मतदान प्रतिशत में अपेक्षित रूप से उतनी बढ़ोत्तरी नहीं हुई, जितना की महिलाओं के मतदान प्रतिशत में हुई। उन्होंने कहा कि इसमें सबसे बड़ी भूमिका साक्षरता की है जिसने महिलाओं में जागरूकता पैदा की है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसमें सामान्य रूप से शिक्षित महिलाओं की भूमिका अधिक रूप से शिक्षित महिलाओं की भूमिका से कम है।
प्रो. संजय कुमार ने भारतीय चुनावों में युवा मतदाताओं की बढ़ती हुई सहभागिता की चर्चा भी की। कहा कि जिन्होंने भारतीय लोकतंत्र को अधिक वाइब्रेंट बनाया है और राजनीतिक दलों का झुकाव महिलाओं के साथ साथ युवा मतदाताओं की तरफ भी है। उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बढ़ती प्रत्याशियों की संख्या का भी विश्लेषण किया और इस संबंध में चुनाव आयोग की ओर से लगाए गए प्रतिबंध की भी चर्चा की।
उनके अनुसार चुनावों में महिला प्रत्याशियों की हिस्सेदारी आनुपातिक रूप से अधिक है और महिला प्रत्याशियों के जीतने की सम्भावना भी अधिक देखी गई है। उनके अनुसार हालिया चुनावों में यह देखने को मिला है कि मतदाता अब बहुत निर्णायक होकर मतदान कर रहे हैं।
अध्यक्षता कर रहे कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आनंद शंकर सिंह ने कहा कि महिलाओं की राजनीति में सहभागिता भारतीय चिंतन परम्परा से प्रेरित है। मैत्रायणी संहिता में राजा को चुनने के लिए जिस बारह सदस्यीय समिति का वर्णन था उसमें एकमात्र महिला सदस्य के स्थान पर न्यूनतम चार महिलाओं के होने की बात की गई। उनके अनुसार आज जब महिलाएं सार्वजनिक क्षेत्र के तमाम क्षेत्रों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कर रही हैं तो ऐसे में राजनीति भी उनसे अछूती नहीं है।
व्याख्यान में अतिथियों का स्वागत और आधार वक्तव्य राजनीति विज्ञान विभाग के संयोजक प्रो. शिव हर्ष ने दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय चुनावों के संवैधानिक स्वरूप को सेकुलर लेकिन उसकी व्यवहारिक शैली को मूलतः धर्म और जाति से प्रेरित बताया। कार्यक्रम का संयोजन राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य और सीएसडीएस लोकनीति के उत्तर प्रदेश इकाई के समन्वयक डॉ अखिलेश पाल ने किया। व्याख्यान का संयोजन राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ अखिलेश त्रिपाठी ने किया।
इस अवसर पर कॉलेज के आईक्यूएसी की संयोजक प्रो. अनुजा सलूजा, दर्शनशास्त्र विभाग की संयोजक प्रो.अमिता पांडेय समेत कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. हर्षमणि सिंह, डॉ. महेंद्र प्रसाद, डॉ. कृपा किंजलकम, डॉ. अश्विनी देवी, डॉ. शिखा श्रीवास्तव, डॉ. अंकित पाठक, कार्तिक अस्थाना सहित विश्वविद्यालय और उसके संघटक महाविद्यालयों के शोधार्थियों समेत महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा प्रयागराज केंद्र के शोधार्थी पवन उपाध्याय, गोविंद वल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान झूंसी की शोधार्थी प्रगति पांडेय एवं नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय के शोधार्थी राकेश यादव आदि उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र