पंचपदी शिक्षण पद्धति से होगा छात्र का पंचकोशीय विकास : गोपाल तिवारी

 


--ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर में नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग

प्रयागराज, 24 मई (हि.स)। सिविल लाइन्स स्थित ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में आयोजित पन्द्रह दिवसीय ’’नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग’’ के चौथे दिन मुख्य वक्ता विद्या भारती काशी सम्भाग निरीक्षक गोपाल तिवारी का पाथेय (मार्गदर्शन) नवचयनित आचार्यों को प्राप्त हुआ।

इस अवसर पर उन्होंने पंचपदी शिक्षण पद्धति विषय पर वर्ग में उपस्थित आचार्य बन्धु भगिनी को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्राचीन भारतीय सनातन परम्परा में पंचपदी (पंचादि) शिक्षण पद्धति केवल एक शिक्षण विधि नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थी के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास का एक अत्यंत वैज्ञानिक मानचित्र है। उन्होंने इसके पांचों मुख्य चरणों-अदिति (विषय को जानना), बोध (गहराई से समझना), अभ्यास (ज्ञान का दृढ़ीकरण), प्रयोग (व्यावहारिक जीवन में उपयोग) और प्रसार (ज्ञान का समाज में विस्तार) की विस्तृत और प्रासंगिक व्याख्या की।

उन्होने इस बात पर विशेष चिंता व्यक्त की कि आधुनिक शिक्षा व्यवस्था अक्सर केवल सूचनाओं को रटने तक सीमित रह गई है। इस खाईं को पाटने के लिए छात्रों को रटंत विद्या के मानसिक दबाव से मुक्त करना होगा और उन्हें कौशलयुक्त व आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस पंचपदी पद्धति को दैनिक पाठ योजनाओं में अनिवार्य रूप से लागू करना होगा। उन्होने कहा कि जब हमारे आचार्य इन पांचों चरणों को आत्मसात कर कक्षा-शिक्षण करेंगे, तभी देश को चरित्रवान, संस्कारी और नवोन्मेषी नागरिक मिलेंगे। यही युवा पीढ़ी आगे चलकर भारत को पुनः विश्व गुरु के गौरवशाली पद पर प्रतिष्ठित करेगी।

विद्यालय के मीडिया प्रभारी सरोज दूबे ने बताया कि इसी कड़ी में अगले दो सत्रों में नवचयनित आचार्य बन्धु भगिनी को ट्रिपल आईटी झलवा के प्रोफेसर मुनीन्द्र ओझा एवं प्रोफेसर के0पी0 सिंह का पाथेय प्राप्त हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत में सर्वोदय नगर के प्रधानाचार्य सुरेश चन्द्र त्रिपाठी ने सभी नवागत अतिथियों का स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्रम तथा श्रीफल भेंट कर स्वागत व अभिनंदन किया।

मीडिया प्रभारी ने बताया कि पन्द्रह दिनों तक चलने वाले इस सघन प्रशिक्षण वर्ग में नवचयनित आचार्य बंधु-भगिनी को शिक्षा जगत के विभिन्न विद्वानों और विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए प्रतिदिन अलग-अलग सत्रों की रूपरेखा तैयार की गई है, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैंः-

’वैचारिक सत्र’ शिक्षा के मूल उद्देश्यों और विद्या भारती की विचारधारा पर विमर्श।’शैक्षिक सत्र’ आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर चर्चा।’क्रियात्मक सत्र’ व्यावहारिक कौशल, अनुशासन और विद्यालय प्रबंधन का सजीव प्रशिक्षण।’चर्चात्मक सत्र’ परस्पर संवाद के माध्यम से शिक्षण की चुनौतियों और उनके समाधानों का अन्वेषण।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र