तनाव का सटीक आकलन अब होगा आसान : प्रो. विनय कुमार पाठक
कानपुर, 03 जुलाई (हि.स.)। युवाओं में बढ़ रही चिंता और मानसिक तनाव की पहचान अब अधिक सटीक तरीके से की जा सकेगी। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 17 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के लिए 'जनरल एंग्जायटी स्केल' विकसित किया है, जिससे समय रहते मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान कर उचित परामर्श उपलब्ध कराया जा सकेगा। यह बातें शुक्रवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहीं।
कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. विमल सिंह, शोधार्थी शुभी रस्तोगी, आईसीएसएसआर फेलो देश दीपक तथा इंटीग्रल यूनिवर्सिटी, लखनऊ की सहायक प्राध्यापिका डॉ. दिव्या आर. पंजवानी ने संयुक्त रूप से 'जनरल एंग्जायटी स्केल' विकसित किया है। यह पैमाना युवाओं में चिंता के स्तर का वैज्ञानिक और विश्वसनीय आकलन करने में सक्षम है।
शोधकर्ताओं के अनुसार यह स्केल चिंता के पांच प्रमुख आयामों—शैक्षणिक, संज्ञानात्मक, भावनात्मक, सामाजिक और व्यवहारिक चिंता—का अलग-अलग मूल्यांकन करता है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि विद्यार्थी किस प्रकार की चिंता से सबसे अधिक प्रभावित है, जिससे उसके अनुरूप परामर्श और उपचार की दिशा तय की जा सकेगी।
स्केल तैयार करने के लिए प्रारंभ में 65 प्रश्न तैयार किए गए थे, जिन्हें विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद 35 प्रश्नों तक सीमित किया गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश के 800 स्नातक विद्यार्थियों पर इसका परीक्षण किया गया। यह 5-प्वाइंट लिकर्ट स्केल पर आधारित है और इसे पूरा करने में लगभग 18 से 20 मिनट का समय लगता है।
प्रमुख शोधकर्ता डॉ. विमल सिंह ने बताया कि इस पैमाने की विश्वसनीयता 0.94 दर्ज की गई है, जो अत्यंत उच्च मानी जाती है। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित जीएडी-7 (GAD-7) स्केल के साथ परीक्षण में 0.62 का सकारात्मक सहसंबंध मिला, जिससे इसकी वैज्ञानिक प्रमाणिकता और प्रभावशीलता की पुष्टि होती है। इस पैमाने को देश की प्रतिष्ठित मनोवैज्ञानिक प्रकाशन संस्था 'प्रसाद साइको प्राइवेट लिमिटेड' ने प्रकाशित किया है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि इस स्केल का उपयोग शिक्षकों, मनोवैज्ञानिकों और काउंसलरों द्वारा विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति का त्वरित आकलन करने में किया जा सकेगा। साथ ही यह स्कूलों, कॉलेजों, करियर काउंसलिंग, मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों, शोध कार्यों और बड़े स्तर के सर्वेक्षणों में भी उपयोगी साबित होगा।
प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि विश्वविद्यालय शोध और नवाचार के क्षेत्र में लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पैमाना युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ-साथ देशभर के शिक्षण संस्थानों के लिए भी उपयोगी साबित होगा।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप