भारतीय चिंतन पर आधारित हो आचार्य जीवन शैली : यतीन्द्र

 


--पहले की शिक्षा नीति यूरोप केन्द्रित थी, आज की नई शिक्षा नीति भारत केन्द्रित: रमेश दत्त पाण्डेय

--पन्द्रह दिवसीय नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग

प्रयागराज, 22 मई (हि.स)। प्रो0 राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) शिक्षा प्रसार समिति द्वारा संचालित सिविल लाइन्स स्थित ज्वाला देवी स0वि0मं0 इण्टर कॉलेज में विद्या भारती से सम्बंद्ध भारतीय शिक्षा समिति पूर्वी उप्र द्वारा संचालित विद्यालयों के नवीन आचार्यों का पन्द्रह दिवसीय नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग 21 मई से 05 जून के बीच सम्पन्न होगा।

भारतीय शिक्षा समिति पूर्वी उप्र के प्रदेश निरीक्षक शेषधर द्विवेदी ने बताया कि काशी प्रांत के सभी विद्यालयों से लगभग 150 आचार्य एवं आचार्या बहनों को उनके बेहतर शिक्षण एवं संस्कारवान युवा पीढ़ी के निर्माण हेतु विषय विशेषज्ञों तथा विद्वानों के द्वारा प्रशिक्षित किया जाना है। प्रशिक्षण वर्ग का उद्घाटन शुक्रवार को विद्यालय में हुआ।

मुख्य अतिथि अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री यतीन्द्र ने सभी को सम्बोधित करते हुये कहा कि हम सभी ऐसी व्यवस्था से जुड़े हुए लोग हैं जो देश में संकल्प लेकर विद्या के क्षेत्र में काम करते हैं। आचार्य केवल पद नहीं है बल्कि यह जीवन जीने की एक शैली है। अतः हम सभी को आचार्यत्व के अनुरुप अपनी वृत्ति रखनी चाहिए तथा उसी के अनुरुप अपने जीवन को ढालना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय चिन्तन सर्वव्यापी है, यह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड ईश्वरमय है और ईश्वर ही इसे चलाता है। हम सभी को ईश्वर के प्रति कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए। आचार्य को अपने जीवन में आये हुये छात्र-छात्राओं के जीवन का निर्माण करना चाहिए तथा निःस्वार्थ भाव से एक साधक की भांति साधना पथ पर चलकर जीवनभर शिष्य को ज्ञान प्रदान करना चाहिए।

रज्जू भैया शिक्षा प्रसार समिति अध्यक्ष रमेश दत्त पाण्डेय ने अध्यक्षता करते हुए बालक का विकास हमारी संकल्पना, कल्पना एवं समग्र विकास की अवधारणा विषय पर नवचयनित आचार्य बंधु-भगिनी को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी संस्था के अन्दर काम करना है तो संस्था के नियम क्या है इसको जानने के लिये प्रशिक्षण आवश्यक होता है। इसी हेतु विद्या भारती प्रतिवर्ष अपने नवीन आचार्य आचार्यों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम करता है। विद्या भारती की संकल्पना भैया बहनों के सर्वांगीण विकास की है, जिसके अंतर्गत भैया बहनों के विकास शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, बौद्धिक एवं अध्यात्मिक दृष्टि से किया जाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि पहले जो शिक्षा नीति बनती थी वह यूरोप केन्द्रित थी जबकि आज की नई शिक्षा नीति भारत केन्द्रित है।

विद्यालय के मीडिया प्रभारी सराेज दूबे ने बताया कि काशी सम्भाग के सम्भाग निरीक्षक गोपाल तिवारी ने अतिथियों का स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्रम एवं श्रीफल देकर सम्मानित किया। पन्द्रह दिनोें तक चलने वाले नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग में संस्कृति, शारीरिक, आध्यात्मिक, योग तथा अन्य शैक्षिक विषयों में बेहतर अधिगम कौशल के विकास हेतु आचार्य बन्धु भगनियों को विभिन्न विद्वानों के द्वारा प्रशिक्षण दिया जायेगा। कार्यक्रम में विद्या भारती पूर्वी उप्र सह क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉ0 राम मनोहर, शेषधर द्विवेदी, गोपाल तिवारी, सुमंत पाण्डेय, सुरेश चन्द्र त्रिपाठी, दिनेश पाण्डेय, दयाराम यादव तथा समिति के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र