नवयुग फेस्ट में दिव्यांग बच्चों के स्टॉल रहे आकर्षण का केंद्र, युवा रचनात्मकता का दिखा अनूठा संगम

 


-सांस्कृतिक आयोजनों से नई पीढ़ी तक पहुंचेगी भारतीय विरासत और परंपराएं

लखनऊ, 04 नवंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में भारतीय संस्कृति, परंपराओं और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार विभिन्न आयोजन किए जा रहे हैं। इसी क्रम में नवयुग कन्या महाविद्यालय, राजेंद्र नगर में रंग दे बसंती संस्था एवं महाविद्यालय की अहिल्याबाई होलकर सांस्कृतिक समिति के संयुक्त तत्वावधान में 'रंग दे बसंती नवयुग फेस्ट' और भजन जैमिंग का भव्य आयोजन किया गया। मेले में भारतीय संस्कृति, स्वदेशी उत्पादों, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण और युवा रचनात्मकता का अनूठा संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम में संगीत नाटक अकादमी की उपाध्यक्ष विभा सिंह और अटारी ग्राम प्रधान एवं प्रधान संघ अध्यक्ष (माल) संयोगिता सिंह चौहान उपस्थित रहीं। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. मंजुला उपाध्याय ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ मेले का शुभारंभ किया। अतिथियों को पौधे, स्मृति चिह्न एवं अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया।

दिव्यांग बच्चों के स्टॉल रहे आकर्षण का केंद्र

मेले में महाविद्यालय की छात्राओं ने खानपान सहित विभिन्न आकर्षक स्टॉल लगाए। मेले का विशेष आकर्षण दिव्यांग बच्चों द्वारा संचालित आशा ज्योति और मुबारकपुर की साड़ी के स्टॉल रहे। विभिन्न स्टॉलों पर खरीदारी और खानपान का आनंद लेते हुए छात्राओं एवं आगंतुकों ने मेले का भरपूर आनंद उठाया। वहीं, रंग दे बसंती संस्था की ओर से ओपन माइक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न रचनात्मक एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं आयोजित हुईं।

संयोगिता सिंह चौहान ने कहा कि वर्तमान समय उत्सवों को उल्लास और सकारात्मकता के साथ मनाने का है। दीपोत्सव केवल बाहरी प्रकाश का पर्व नहीं, बल्कि यह हमारे भीतर नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करता है, जो भविष्य के कार्यों को नई दिशा देती है। वहीं, महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. मंजुला उपाध्याय ने कहा कि भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की स्मृति में मनाया जाने वाला दीपावली पर्व भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक है।

रंग दे बसंती संस्था के समन्वयक विश्वदीप शुक्ल ने बताया कि संस्था का उद्देश्य जेन-जी के विचारों, समस्याओं और अपेक्षाओं को समझने के साथ युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना तथा भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं को बढ़ावा देना है।

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन