प्राकृतिक खेती से बदली तकदीर, मुख्यमंत्री से मिला सम्मान
-बिना रसायन और कम लागत में बंपर पैदावार कर दूसरों के लिए बने मिसाल-मल्टीलेयर फार्मिंग और देसी नुस्खों से कमा रहे मोटा मुनाफा, हजारों किसानों को कर रहे जागरूक
कानपुर, 18 जून (हि.स.)। चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय में प्राकृतिक खेती को लेकर आयोजित कार्यक्रम में गुरुवार को उन प्रगतिशील किसानों को विशेष रूप से पुरस्कृत किया गया, जिन्होंने प्राकृतिक खेती को न सिर्फ अपनाया बल्कि उसे मुनाफे का सौदा बनाकर एक नई मिसाल पेश की है। इन किसानों की कहानी साबित करती है कि बिना महंगे केमिकल के भी बेहतरीन और सुरक्षित खेती की जा सकती है।
बिठूर के आशीष ने 800 किसानों को जोड़ा
बिठूर के पैगूपुर के रहने वाले आशीष त्रिपाठी पिछले पांच सालों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उन्होंने 'नमामि गंगे प्रोजेक्ट' के तहत जैविक खेती योजना से इसके गुर सीखे थे। आज वे अपने खेतों में गेहूं और अरहर जैसी फसलें पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से उगा रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने जुलाई 2024 में 'लवकुश फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी' बनाई और अब तक करीब 800 किसानों को प्राकृतिक खेती की बारीकियाँ सिखाकर जागरूक कर चुके हैं।
शिवराजपुर के राजेश दे रहे जैविक खाद की ट्रेनिंग
शिवराजपुर के मुंहपोछा गांव के रहने वाले राजेश कुमार त्रिपाठी मुख्य रूप से बाजरा और मक्का जैसी फसलों की प्राकृतिक खेती करते हैं। वे लवकुश फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी से जुड़े हुए हैं। राजेश खुद तो अपनी खेती से फायदा कमा ही रहे हैं, साथ ही वे आस-पास के चार गांवों के 150 किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीक सिखा रहे हैं और उन्हें अपने बगीचे में जैविक खाद बनाने का बकायदा प्रशिक्षण भी देते हैं।
फूल सिंह यादव चला रहे खुद का स्टार्टअप
झींझक के जासापुर गांव के रहने वाले फूल सिंह यादव साल 2008 से लगातार प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और उनके पास इस खेती का 18 से 20 साल का लंबा अनुभव है। वे अपने खेत में सात तरह के मिलेट्स (मोटे अनाज) और सभी प्रकार की दालें पूरी तरह बिना रसायन के उगाते हैं। खुद का स्टार्टअप चलाकर वे अपने उत्पाद बाजार में बेचते हैं। सीएसए के वैज्ञानिकों से लगातार सीखने वाले फूल सिंह अब तक 2000 से ज्यादा किसानों को इस मुहिम से जोड़ चुके हैं।
बिल्हौर के सुनील सिंह करते हैं मल्टीलेयर फार्मिंग
बिल्हौर के भीटी हवेली रहने वाले सुनील सिंह 'मल्टीलेयर फार्मिंग' (एक साथ कई फसलें उगाना) के उस्ताद माने जाते हैं। वे मचान विधि से कुंदरू, परवल और तरोई-लौकी जैसी सब्जियां उगाते हैं और ठीक उसी के नीचे की परत में गेंदा, हल्दी की खेती करते हैं। वे सवा हेक्टेयर में यह मल्टीलेयर फार्मिंग कर रहे हैं और इसके साथ ही करीब 6-7 हेक्टेयर में आलू, मक्का व धान की पूरी तरह रसायन मुक्त खेती कर रहे हैं। उनकी यह तकनीक युवाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं।
छोटे लाल ने दो एकड़ में तैयार किया मुनाफे का मॉडल
पिछले तीन सालों से प्राकृतिक खेती कर रहे छोटे लाल भी मल्टीलेयर फार्मिंग के दम पर बड़ा मुनाफा कमा रहे हैं। वे कुल दो एकड़ में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, जिसमें से एक एकड़ क्षेत्र में वे गेहूं, अरहर, परवल, कुंदरू और मूंगफली जैसी कई फसलें एक साथ उगाते हैं, जबकि बाकी बचे एक एकड़ हिस्से में बागवानी वाली फसलें रखते हैं। छोटे लाल का कहना है कि जीवामृत और घर की चीजों से होने वाली यह खेती पूरी तरह कीटमुक्त, सुरक्षित और बेहद कम लागत वाली है, जिसे हर किसान को अपनाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक कृषि में उत्कृष्ट कार्य करने वाले छोटेलाल, राजेश कुमार त्रिपाठी, आशीष कुमार, सुनील सिंह कटियार, फूल सिंह यादव को सम्मानित किया। कृषक दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत दिनेश कुमार तथा उमा सिंह को 5-5 लाख रुपये का चेक प्रदान किया। प्रगतिशील किसान विपिन शुक्ला व आशीष कुमार को श्री अन्न की किट प्रदान की। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने मुख्यमंत्री को गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा लिखित 'प्राकृतिक खेती' नामक पुस्तक भेंट की। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री को बिठूर के माटी कला कारीगरों एवं आईटीआईटी कानपुर द्वारा निर्मित मिट्टी की गुल्लक एवं प्रसिद्ध कलाकार रंजीत सिंह द्वारा निर्मित ताम्र चित्र भेंट की।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप