भारतीय शिक्षा को सूचना नहीं, बल्कि ज्ञान का केंद्र बनाना होगा : प्रो. राजशरण शाही

 


















गोरखपुर, 25 अप्रैल (हि.स.)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पुरातन छात्र सम्मेलन का भव्य आयोजन हुआ। देशभर से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों, नीति-निर्माताओं और पुरातन छात्रों ने “विकसित भारत @2047: शिक्षक शिक्षा की भूमिका” विषय पर गहन विमर्श किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। संगोष्ठी की संयोजक प्रो. सुषमा पाण्डेय ने प्रस्तावना प्रस्तुत की, जबकि संचालन एवं स्वागत भाषण डॉ. राजेश कुमार सिंह ने किया। प्रथम सत्र की अध्यक्षता प्रो. सुनीता दुबे ने की तथा आभार ज्ञापन प्रो. उदय सिंह ने किया।

मुख्य अतिथि प्रो. राजशरण शाही ने कहा कि “भारतीय शिक्षा को सूचना नहीं, बल्कि ज्ञान का केंद्र बनाना होगा। शिक्षा की जड़ें राष्ट्र की संस्कृति से जुड़ी हों और शिक्षक निर्माण में व्यापक सुधार आवश्यक हैं, तभी विकसित भारत का लक्ष्य साकार होगा।” उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में समयानुकूल परिवर्तन पर जोर दिया।

संगोष्ठी में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में शिक्षक शिक्षा की वर्तमान चुनौतियों, डिजिटल एवं एआई आधारित नवाचार, समावेशी शिक्षा, भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS), गुणवत्ता सुनिश्चितता और 21वीं सदी के कौशल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आज का शिक्षक केवल ज्ञान प्रदाता नहीं, बल्कि मार्गदर्शक, नवप्रवर्तनकर्ता और सामाजिक परिवर्तन का अग्रदूत है।

द्वितीय सत्र में आयोजित पुरातन छात्र सम्मेलन की अध्यक्षता कुलपति प्रो. पूनम टण्डन ने की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रशांत मिश्र एवं विशिष्ट अतिथि राजेश उपाध्याय सहित अनेक पुरातन छात्रों ने अपने अनुभव साझा किए और विभागीय विकास में सहयोग का संकल्प लिया।

अपने उद्बोधन में कुलपति प्रो. टण्डन ने कहा कि यह आयोजन शिक्षाशास्त्र विभाग की अकादमिक सक्रियता का प्रमाण है और “विकसित भारत @2047” के लक्ष्य में शिक्षक शिक्षा की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करता है।

कार्यक्रम में प्रो. विभ्राट चंद्र कौशिक, प्रो. बृजेश पांडेय, प्रो. कुमुद त्रिपाठी, प्रो. विजय राय, प्रो. मैथिली रमण सिंह, प्रो. अर्चना पाण्डेय सहित अनेक शिक्षकों और शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही।

अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया और विश्वास जताया कि संगोष्ठी से निकले निष्कर्ष शिक्षक शिक्षा में नीतिगत एवं व्यवहारिक सुधारों को नई दिशा देंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय