नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की करोड़ों माताओं-बहनों के सम्मान का संकल्प
संसद व विधानसभाओं में महिला नेतृत्व के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा : बेबीरानी मौर्य
लखनऊ, 11 अप्रैल (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्री एवं उत्तर प्रदेश सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने शनिवार को पार्टी के राज्य मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023” को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक ऐतिहासिक और युगांतरकारी निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम देश की करोड़ों माताओं बहनों के सम्मान का संकल्प है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत के उज्ज्वल, समावेशी और सशक्त भविष्य की आधारशिला है।” यह महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति निर्माण की प्रक्रिया में सशक्त भागीदार और निर्णयकर्ता बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
बेबी रानी मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार द्वारा लाया गया यह कानून देश की करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों के सम्मान और अधिकारों का राष्ट्रीय संकल्प है। संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने वाला यह संवैधानिक संशोधन लोकतंत्र को अधिक समावेशी, संवेदनशील और प्रभावी बनाएगा।
उन्होंने कहा कि भारत में महिलाएं मतदान और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों में निरंतर आगे बढ़ रही हैं, लेकिन राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी अपेक्षाकृत कम है। भागीदारी बढ़ी है, लेकिन प्रतिनिधित्व संतुलित नहीं है। इसी अंतर को समाप्त करने के लिए यह कानून अत्यंत आवश्यक है,।
उन्होंने बताया कि वैश्विक और भारतीय अनुभव यह दर्शाते हैं कि जब महिलाएं नेतृत्व करती हैं, तो नीतियां अधिक संवेदनशील बनती हैं और शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि विभिन्न शोधों के अनुसार जेंडर गैप कम होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़े स्तर पर वृद्धि संभव है।
उन्होंने पिछले 10 वर्षों में महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में हुए ठोस कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि करोड़ों महिलाओं के बैंक खाते खुले, बड़ी संख्या में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ उन्हें मिला। उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, मातृत्व अवकाश में वृद्धि जैसे कदमों ने महिलाओं के जीवन स्तर में व्यापक सुधार किया है।
उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर लगभग 46 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व यह दर्शाता है कि महिलाओं को अवसर मिलने पर वे प्रभावी नेतृत्व प्रदान करती हैं। अब यही मॉडल संसद और विधानसभाओं में लागू होगा, जिससे नीति निर्माण अधिक जन-केंद्रित और जवाबदेह बनेगा।
उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 केवल आरक्षण का प्रावधान नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, समान अवसर और सशक्त लोकतंत्र की दिशा में एक व्यापक सुधार है। विकसित भारत 2047 का सपना महिला नेतृत्व के बिना अधूरा है।उन्होंने कहा कि जब नारी सशक्त होती है, तो समाज सशक्त होता है और जब समाज सशक्त होता है, तो राष्ट्र मजबूत होता है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत के उज्ज्वल, समावेशी और सशक्त भविष्य की आधारशिला है। इस अवसर पर महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष रंजना उपाध्याय एवं महिला मोर्चा कि प्रदेश मंत्री ममता पाण्डेय भी उपस्थित रहीं।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन