गुणवत्ता और नवाचार से वैश्विक पहचान बनाएं एमएसएमई : वी.के. वर्मा
कानपुर, 29 जून (हि.स.)। एमएसएमई क्षेत्र के उद्यमियों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता, नवाचार और डिज़ाइन पर विशेष ध्यान देना होगा, तभी वे वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान बना सकेंगे। महिला उद्यमी सरकारी खरीद नीति और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर अपने कारोबार का विस्तार कर सकती हैं। यह बातें सोमवार को एमएसएमई-विकास एवं सुविधा कार्यालय, कानपुर के निदेशक वी.के. वर्मा ने एमएसएमई दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यशाला में कहीं।
एमएसएमई-विकास एवं सुविधा कार्यालय, कानपुर की ओर से फिक्की फ्लो (महिला) के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में महिला उद्यमियों को केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं, उद्यम पंजीकरण, सार्वजनिक खरीद नीति और निर्यात की संभावनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने उद्यमियों को सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
उपनिदेशक एस.के. पाण्डेय ने बताया कि एमएसएमई क्षेत्र देश में रोजगार सृजन का दूसरा सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने कहा कि भारत के कुल निर्यात में एमएसएमई की लगभग 48.5 प्रतिशत और सकल घरेलू उत्पाद में करीब 31 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो इसकी आर्थिक महत्ता को दर्शाती है।
सहायक निदेशक अमित बाजपेयी ने पीएमएस योजना, उद्यम पंजीकरण और सार्वजनिक खरीद नीति की जानकारी देते हुए बताया कि उद्यम पंजीकरण पूरी तरह ऑनलाइन, निःशुल्क और पेपरलेस प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक खरीद नीति के तहत सरकारी खरीद का 25 प्रतिशत एमएसएमई से तथा उसमें से 3 प्रतिशत महिला स्वामित्व वाले उद्यमों से किए जाने का प्रावधान है।
एफआईईओ के सहायक निदेशक आलोक कुमार श्रीवास्तव ने निर्यात प्रक्रिया, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की संभावनाओं और विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ सांख्यिकी अधिकारी सोनिका रस्तोगी ने किया। अंत में सहायक निदेशक अविनाश कुमार अपूर्व ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप