120 मानकों पर संवरेंगे मुरादाबाद के 15 पीएम श्री विद्यालय

 


मिशन कायाकल्प के 19 मानकों से हो चुके हैं संतृप्त

जिलाधिकारी डॉ राजेंद्र पैंसिया द्वारा शनिवार को पीएम श्री कम्पोजिट विद्यालय बिलारी के निरीक्षण

मुरादाबाद, 16 मई (हि.स.)। जिले में बेसिक शिक्षा की तस्वीर को पूरी तरह से बदलने और हाईटेक करने की बड़ी कार्ययोजना तैयार की गई है। मुरादाबाद के 15 पीएम श्री विद्यालयों को अब 'मॉडल और लीडरशिप स्कूल' के रूप में विकसित किया जाएगा।

शनिवार को जिलाधिकारी डॉ राजेंद्र पैंसिया द्वारा पीएम श्री कम्पोजिट विद्यालय बिलारी के निरीक्षण के बाद यह रूपरेखा तय की गई है। इन स्कूलों का कायाकल्प इन्फ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़े 120 विशेष मानकों के आधार पर किया जाएगा। इन्हें देश में स्वच्छता के लिए नंबर वन का पुरस्कार पा चुके संभल जिले के इटायला माफी स्थित पीएम श्री विद्यालय की तर्ज पर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा।

120 मानकों पर होगा 360 डिग्री विकास

जिलाधिकारी डॉ राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि पीएम श्री योजना के तहत इन 15 विद्यालयों को 6 प्रमुख पिलर्स पर विकसित किया जाना है। इसमें मात्रात्मक (इन्फ्रास्ट्रक्चर) से लेकर गुणात्मक (क्वालिटी एजुकेशन) तक कुल 120 बिंदु तय किए गए हैं। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि इन 120 में से मिशन कायाकल्प के तहत आने वाले 19 मूलभूत मानकों को विद्यालयों में पहले ही पूरा (संतृप्त) किया जा चुका है। अब कार्ययोजना के तहत शेष मानकों पर तेजी से काम होगा, ताकि इन्हें पूरी तरह से एक आदर्श विद्यालय का स्वरूप दिया जा सके।

इटायला माफी स्कूल बनेगा प्रेरणास्रोत

जिले के इन मॉडल स्कूलों को विकसित करने के लिए संभल जिले के पीएम श्री प्राथमिक विद्यालय इटायला माफी (विकास खंड असमौली) को बेंचमार्क माना गया है। गौरतलब है कि इटायला माफी विद्यालय को देश के नंबर वन स्वच्छ विद्यालय के रूप में पुरस्कृत किया जा चुका है, जहां मा. राज्यपाल सहित कई मंत्री और अधिकारी इसकी व्यवस्थाओं का जायजा लेने आ चुके हैं। जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान कार्यदायी संस्थाओं और अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद बिलारी को निर्देश दिए कि बिलारी सहित सभी 15 पीएम श्री स्कूलों का भौतिक और शैक्षिक विकास बिल्कुल उसी तर्ज पर किया जाए।

लर्निंग बाय डूइंग' से निखरेगी प्रतिभा

भौतिक चकाचौंध के साथ-साथ पढ़ाई के स्तर को सुधारने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। विद्यालय में बालवाटिका और प्राथमिक स्तर के बच्चों को अब 'लर्निंग बाय डूइंग' (करके सीखना) पद्धति के तहत शिक्षा दी जाएगी, ताकि वे रटने के बजाय चीजों को प्रायोगिक तौर पर समझ सकें। वहीं, कक्षा 1 और कक्षा 4 के बच्चों की व्याकरण संबंधी अशुद्धियों को 'मेरी त्रुटियां मेरी सीख' कार्यपुस्तिका के माध्यम से सुधारा जाएगा।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विमलेश कुमार के अनुसार, बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता मापने के लिए 'निपुण टीम' द्वारा नियमित मूल्यांकन होगा और एआरपी/एसआरजी द्वारा लगातार इनकी ट्रैकिंग की जाएगी।

हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल