मोदी सरकार महिला आरक्षण को हथियार के रुप में करना चाहती है इस्तेमाल : भाकपा (माले)
लखनऊ, 16 अप्रैल (हि.स.)। भाकपा (माले) ने महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग करने की मांग की है। पार्टी के लोकसभा में दो सांसद हैं। भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने गुरूवार काे कहा कि सरकार महिला आरक्षण को एक बार फिर से हथियार के रुप में इस्तेमाल करना चाहती है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बीच, महिला आरक्षण (संशोधन) विधेयक पारित करने के लिए आनन-फानन में संसद का विशेष सत्र बुलाने की इस जल्दबाजी के पीछे छिपे खतरनाक मंसूबों को पहचानने की जरुरत है।
यादव ने कहा कि अगर मोदी सरकार के पास वास्तविक राजनीतिक इच्छाशक्ति होती, तो वह महिला आरक्षण को संसद में पहली बार (2023 में) बिल पेश करते समय ही 'परिसीमन' व 'जनगणना' से अलग कर सकती थी और मौजूदा सीटों के आधार पर ही इसे तुरंत लागू कर सकती थी।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना और कुछ नहीं बल्कि एक ऐसा परिसीमन बिल थोपने की कोशिश है, जो देश के भीतर पहले से ही नाजुक संघीय ढांचे के संतुलन को बिगाड़ने का डर पैदा करता है।
नया परिसीमन विधेयक न केवल दक्षिण भारतीय राज्यों को उनके उचित हक से वंचित करने की धमकी देता है, बल्कि अधिक केंद्र शासित प्रदेश (यूनियन टेरिटरी) बनाकर केंद्रीकरण को बढ़ावा देने का संकेत भी देता है। यह संविधान पर हमला है। इस भयावह परिसीमन योजना को हर हाल में रोका जाना चाहिए।
कॉमरेड सुधाकर ने कहा कि सरकार को महिला आरक्षण के नाम पर संसद के विशेष सत्र में दक्षिण भारत, छोटे राज्यों और भारत के अल्प-प्रतिनिधित्व वाले बहुजन समुदाय के हक को छीनने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
इसलिए पार्टी की मांग है कि महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग किया जाए। जाति जनगणना पूरी की जाए। परिसीमन नवीनतम जनगणना के आंकड़ों और जातिगत गिनती के आधार पर हो।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्द्र पाण्डेय