भ्रामक विमर्श युवाओं को भ्रमित कर रहे, सकारात्मक सोच आगे बढ़ाने की जरूरत : प्रो. अनूप सिंह

 


कानपुर, 11 मई (हि.स.)। वर्तमान समय में भ्रामक विमर्श युवाओं को भ्रमित करने का कार्य कर रहे हैं। शिक्षकों और बुद्धिजीवियों को राष्ट्रहित में सकारात्मक और तथ्यपूर्ण विमर्श को आगे बढ़ाना चाहिए। यह बातें सोमवार को पीपीएन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अनूप सिंह ने कहीं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर कानपुर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का विषय “भारत का वर्तमान परिदृश्य : चुनौतियां एवं संभावनाएं” रहा, जिसमें विभिन्न विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) कानपुर प्रांत की प्रांत उपाध्यक्ष डॉ. प्रियंका सिंह ने कहा कि समरसता केवल समानता नहीं, बल्कि पारस्परिक सम्मान है। उन्होंने कहा कि अधिकारों से पहले कर्तव्यों पर ध्यान देना आवश्यक है तथा भारतीय दृष्टि से “स्व” का बोध ही आधुनिकता का निर्माण करता है।

उन्होंने पर्यावरणीय चुनौतियों के संदर्भ में समाज केंद्रित शोध और सतत विकास आधारित नवाचारों की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. प्रियंका सिंह ने कहा कि यदि तकनीक के साथ संस्कृति, ज्ञान के साथ चरित्र और प्रतिभा के साथ राष्ट्रभाव जुड़ जाए तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता।

कार्यक्रम के अंत में केआईटी के डीन डॉ. आर. के. पांडे ने अतिथियों और प्रबुद्ध जनों का आभार व्यक्त किया। इस दौरान गोष्ठी आयोजक मयंक पासवान, सुधांशु त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप