सभी कोर्स को एआई इंटीग्रेटेड करने वाला देश का पहला विवि बन रहा एमजीयूजी
गोरखपुर, 08 अप्रैल (हि.स.)। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) देश का ऐसा पहला विश्वविद्यालय बनने जा रहा है जहां इस शैक्षिक सत्र से सभी कोर्स (पाठ्यक्रम) एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) इंटीग्रेटेड कर दिए गए हैं। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशानिर्देश पर विश्वविद्यालय में संचालित सभी पाठ्यक्रमों में एआई को सम्मिलित किया गया है। सभी कोर्स अब एआई इंटीग्रेटेड कोर्स हैं।
कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में उप कुलसचिव ने कहा कि एमजीयूजी भारत का पहला ऐसा विश्वविद्यालय बनने जा रहा है, जिसमें हर कोर्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को परिचित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में यह विश्वविद्यालय, महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमपीआईटी) के साथ मिलकर एआई के एक बड़े अभियान पर कार्यरत है। इसके माध्यम से देश और प्रदेश के विद्यार्थी एआई की प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के साथ साझेदारी में कार्य किया जा रहा है, जिसमें अब तक 5 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। विश्वविद्यालय के सभी कोर्सों में एआई को सफलतापूर्वक सम्मिलित किया गया है।
प्रवेश समिति की बैठक में अवगत कराया गया कि सत्र 2026-27 से विश्वविद्यालय में एमएससी फोरेंसिक साइंस, बीबीए ई-कॉमर्स, बीएससी मेडिकल साइंस, बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (बीसीए), मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (एमसीए), एमएससी एग्रोनॉमी, एमएससी हॉर्टिकल्चर, एमएससी प्लांट पैथोलॉजी, एमएससी जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग, एमबीए इन एग्रीकल्चर मैनेजमेंट, एमबीए एग्री बिजनेस मैनेजमेंट, एमबीए फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट, एमबीए हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन एंड हेल्थकेयर मैनेजमेंट, एमबीए डुअल स्पेशलाइजेशन इन एचआर, फाइनेंस, मार्केटिंग, आईटी, ऑपरेशंस के नए पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। आवेदन फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 है। प्रवेश परीक्षा 17, 20 और 24 मई 2026 को आयोजित की जाएगी। इच्छुक अभ्यर्थी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट www. mgug.ac.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
बैठक में शैक्षिक सत्र 2026-27 में प्रवेश के लिए प्राप्त आवेदनों की समीक्षा की गई। समिति के समन्वयक डॉ. शशिकांत सिंह ने बताया कि एमजीयूजी के प्रमुख पाठ्यक्रमों बीएससी बायोकेमिस्ट्री, बीएससी माइक्रोबायोलॉजी, बीएससी मेडिकल बायोकेमिस्ट्री, बीएससी मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी, एमएससी फॉरेंसिक साइंस, बीएससी एग्रीकल्चर, एमएससी एग्रीकल्चर, बीसीए, बीबीए एवं एमबीए में सीटों की तुलना में अत्यधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। इससे इन व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों का रुझान स्पष्ट है।
प्रवेश समिति की बैठक में कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह ने आवेदनों की संख्या पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि हमें प्रदेश के अतिरिक्त अन्य राज्यों विशेषकर बिहार व मित्र देश नेपाल के अधिक से अधिक विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे विश्वविद्यालय को सर्वव्यापी व शिक्षा का उत्कृष्ट स्तम्भ बनाने की परिकल्पना को साकार किया जा सकेगा। कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव ने कहा कि सभी प्रभावी माध्यमों के जरिये इस विश्वविद्यालय का प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए, ताकि समाज के दूरस्थ एवं वंचित वर्गों तक भी विश्वविद्यालय में संचालित पाठ्यक्रमों की जानकारी पहुंच सके। ताकि उन्हें भी यह अवसर मिल सके कि वे गुणवत्तापरक शिक्षा ग्रहण कर समाज की मुख्य धारा से जुड़ सकें।
बैठक में डीन एकेडमिक डॉ. प्रशांत एस, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल संकाय की अधिष्ठाता डॉ. डीएस अजीथा, संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता डॉ. सुनील सिंह, कृषि संकाय के अधिष्ठाता डॉ. विमल कुमार दूबे, कंप्यूटर साइंस संकाय के अधिष्ठाता डॉ. हरिओम शरण, वाणिज्य संकाय के अधिष्ठाता डॉ. तरुण श्याम, पैरामेडिकल कॉलेज के प्राचार्य रोहित श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय