रूस-यूक्रेन संघर्ष में कानपुर के मर्चेंट नेवी अधिकारी की मौत, 10 दिन बाद भी नहीं पहुंचा शव

 


कानपुर, 28 जलाई (हि.स.)। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का दर्द अब कानपुर के एक परिवार तक पहुंच गया है। ब्लैक सी में 18 जुलाई को हुए ड्रोन हमले में कानपुर के शास्त्री नगर निवासी और मर्चेंट नेवी के चीफ ऑफिसर सागर गुप्ता (30) की मौत हो गई। हादसे के 10 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उनका पार्थिव शरीर भारत नहीं पहुंच सका है। परिवार सरकार से जल्द शव स्वदेश लाने के साथ आर्थिक सहायता और उचित सम्मान दिलाने की मांग कर रहा है।

काकादेव थाना क्षेत्र के शास्त्री नगर निवासी सागर गुप्ता मुंबई स्थित एवन नेवीगेटर्स कंपनी में चीफ ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे। परिजनों के अनुसार वह जून में घर से मुंबई गए थे और वहां से तुर्किये के रास्ते कार्गो शिप पर सवार होकर रूस के एक बंदरगाह की ओर रवाना हुए थे। 18 जुलाई को ब्लैक सी क्षेत्र में जहाज पर ड्रोन से हमला हुआ, जिसमें उनकी मौत हो गई। घटना की जानकारी पहले उनके साथ काम करने वाले एक कर्मचारी ने फोन कर दी, जिसके बाद डीजी शिपिंग कार्यालय से भी परिवार को इसकी पुष्टि की गई।

सागर की पत्नी शालू गुप्ता ने मंगलवार को बताया कि 17 जुलाई को उनकी पति से आखिरी बार बातचीत हुई थी। उसके बाद उनका फोन नहीं लगा। कुछ दिन बाद हादसे की सूचना मिली। उन्होंने कहा कि आज भी परिवार को उनके पार्थिव शरीर के आने का इंतजार है। सरकार से मांग है कि जल्द से जल्द शव भारत लाकर अंतिम संस्कार कराया जाए और परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

सागर की मां रामादेवी का कहना है कि बेटे की मौत के बाद से पूरा परिवार गहरे सदमे में है। उन्होंने कहा कि अब उनकी सिर्फ एक ही इच्छा है कि बेटे का पार्थिव शरीर जल्द घर पहुंच जाए, ताकि अंतिम दर्शन कर सकें। उन्होंने सरकार से मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए शीघ्र कार्रवाई की अपील की।

मृतक के बड़े भाई मनीष गुप्ता ने मंगलवार काे बताया कि सागर ही पूरे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभालते थे। परिवार में बुजुर्ग मां, पत्नी, पांच वर्ष की बेटी और सात माह का बेटा है। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद से शव भारत लाने की प्रक्रिया को लेकर परिवार लगातार अधिकारियों के संपर्क में है, लेकिन अब तक स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है कि पार्थिव शरीर कब तक कानपुर पहुंचेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि शव जल्द भारत लाया जाए, परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए और सागर के योगदान को देखते हुए उन्हें सम्मानजनक दर्जा दिया जाए।

परिजनों के मुताबिक सागर की पांच वर्षीय बेटी अब भी अपने पिता के घर लौटने का इंतजार कर रही है, जबकि सात माह का बेटा अपने पिता के स्नेह से हमेशा के लिए वंचित हो गया। परिवार का कहना है कि इस कठिन समय में उन्हें प्रशासन और सरकार से हरसंभव सहयोग की उम्मीद है।

तीन सदस्यीय समिति गठित

सागर गुप्ता की हुई मौत के मामले में जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने परिजनाें की ओर से दिए गये प्रार्थना पत्र के बाद तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने का फैसला लिया हैै। समिति में श्रम प्रवर्तन अधिकारी हेमंत कुमार, दीपक कुमार मौर्य और संतोष कुमार को शामिल किया गया है। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि परिजनाें से संपर्क कर पूरे प्रकरण की जांच करें तथा विदेश मंत्रालय, भारत सरकार, श्रम मंत्रालय और अन्य संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे। साथ ही सागर गुप्ता का पार्थिव शरीर भारत लाने की प्रक्रिया में तेजी लाने और शोकाकुल परिवार को हरसंभव प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप