डिजिटल युग में मीडिया की निष्पक्षता और साहित्य की गहराई आवश्यक: प्रो. राजेश द्विवेदी
कानपुर, 17 मार्च (हि.स.)। “डिजिटल युग में मीडिया की निष्पक्षता और साहित्य की गहराई राष्ट्र के पुनरुत्थान के लिए अत्यंत आवश्यक है। मीडिया, साहित्य और सिनेमा समाज में नई राष्ट्रीय चेतना जागृत करने के सशक्त माध्यम हैं और इनके जरिए ही विचारों, मूल्यों और संस्कृति को सही दिशा दी जा सकती है,” यह बातें मंगलवार को प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी ने कहीं।
सीएसजेएमयू, कानपुर के पत्रकारिता विभाग के सहयोग से भारतीय महाविद्यालय, फर्रुखाबाद में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का विधिवत शुभारम्भ हुआ। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रबंध समिति के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार त्रिपाठी ने की। उन्होंने कहा कि इस तरह की संगोष्ठियां शैक्षणिक मंथन के माध्यम से राष्ट्रीय विमर्श को नई दिशा देती हैं और साहित्य व फिल्म जैसे विषयों पर नए आयाम स्थापित करती हैं।
मुख्य अतिथि प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी ने मीडिया, साहित्य और सिनेमा की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता प्रो. रवींद्र प्रताप सिंह ने साहित्य को राष्ट्र की आत्मा बताते हुए कहा कि यह अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ने का कार्य करता है।
विशिष्ट वक्ता प्रो. नीरू टंडन ने मीडिया और फिल्मों के माध्यम से संस्कृति संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं प्रो. जावा कुसुम सिंह ने कहा कि सिनेमा समाज का दर्पण है, जो न केवल समाज को दर्शाता है बल्कि उसे प्रभावित भी करता है।
संगोष्ठी के संयोजक डॉ. निधीश कुमार सिंह ने बताया कि दो दिवसीय आयोजन में देश-विदेश के विद्वान शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। सह संयोजक डॉ. दिवाकर अवस्थी ने बताया कि संगोष्ठी में विभिन्न देशों के विद्वान ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से सहभागिता कर रहे हैं।
उद्घाटन सत्र में पुस्तकों का विमोचन भी किया गया और अंत में प्राचार्य डॉ. रमण प्रकाश ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संदीप कुमार द्विवेदी एवं प्राची गोस्वामी ने किया।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप