फाइलेरिया उन्मूलन में सामुदायिक भागीदारी पर मंथन,नवंबर से शुरू होगा अभियान

 


लखनऊ, 13 अक्टूबर (हि.स.)। प्रदेश में फाइलेरिया उन्मूलन के प्रयासों को प्रभावी बनाने और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से मंगलवार को लखनऊ के एक निजी होटल में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें दवा सेवन के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ाने और समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर मंथन हुआ। नवंबर माह में 16 जनपदों की 53 प्लानिंग यूनिट्स में प्रस्तावित सर्वजन दवा सेवन अभियान चलाने की तैयारियों पर भी मंथन हुआ।

महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. पवन कुमार अरुण ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए केवल दवा वितरित करना पर्याप्त नहीं है। लोगों को दवा सेवन और बीमारी से बचाव के महत्व के प्रति जागरूक करना भी जरूरी है।

क्षेत्रीय निदेशक, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. जुल्फिकार अहमद ने फ्रंटलाइन वर्कर्स की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वे लोग नीतियां बनाते हैं, लेकिन समुदाय के लोगों तक कार्यक्रम को पहुंचाने में फ्रंटलाइन वर्कर्स की भूमिका अहम होती है।

राज्य फाइलेरिया अधिकारी डॉ. ए.के. चौधरी ने कहा कि दवा के संभावित दुष्प्रभावों का डर, बीमारी के प्रति जागरूकता की कमी, गलत धारणाएं, कामकाज की व्यस्तता और प्रवास जैसे कारणों से कई लोग दवा का सेवन नहीं करते। ऐसे में स्थानीय परिस्थितियों को समझते हुए लोगों से निरंतर संवाद करना और उनकी आशंकाओं को दूर करना जरूरी है।

बाराबंकी के टीपाहार आयुष्मान आरोग्य मंदिर की सीएचओ नेहा वर्मा ने बताया कि समुदाय और मरीजों की भागीदारी से दवा सेवन बढ़ाने में मदद मिली है। फरवरी में एमडीए अभियान के दौरान सभी संबंधित लोगों के साथ मिलकर रणनीति बनाई गई, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 98 प्रतिशत लोगों ने दवा का सेवन किया।

कार्यक्रम में निदेशक संचारी रोग डॉ. रेखा रानी, संयुक्त निदेशक मलेरिया डॉ. विकास सिंघल, विभिन्न जनपदों के संचारी रोग नोडल अधिकारी, जिला मलेरिया अधिकारी, पंचायती राज, खाद्य एवं रसद तथा शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

------------------

हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन