मथुरा : मुस्लिम कारीगरों के हाथों तैयार हो रहीं ठाकुरजी की पोशाकें
मथुरा, 02 सितम्बर(हि.स.)। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव नजदीक आते ही पूरी दुनिया में उत्साह का माहौल है। ब्रज से लेकर देश-विदेश में घर-घर चार सितंबर को बालगोपाल का प्राकट्योत्सव मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर ठाकुरजी को नई और आकर्षक पोशाकें धारण कराई जाएंगी। दुनिया भर में प्रसिद्ध वृंदावन की पोशाकें इस बार भी अपनी खास चमक बिखेरने के लिए तैयार हैं, जिन्हें बनाने में पीढ़ियों से एक खास समुदाय का बड़ा योगदान रहा है।
राधा-कृष्ण की लीलाभूमि वृंदावन में आज भी हिंदू-मुस्लिम सद्भाव की अनूठी मिसाल देखने को मिलती है। श्रीकृष्ण के संदेशों की संवाहक इस धरती पर देवी-देवताओं के वस्त्र तैयार करने वाले कारीगरों में हिंदुओं के साथ बड़ी संख्या में मुस्लिम परिवार भी शामिल हैं। स्थानीय जानकारों के मुताबिक, वृंदावन में लगभग 50 प्रतिशत कारीगर मुस्लिम समुदाय से हैं जो ठाकुरजी और श्रीराधारानी की पोशाकें तैयार करते हैं।
जन्माष्टमी के पावन पर्व के लिए देश ही नहीं बल्कि दुनिया के कई स्थानों से पोशाकों के भारी ऑर्डर मिले हैं। मांग को पूरा करने के लिए कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। जरदोजी का काम करने वाले कारीगर अफजाल बताते हैं कि ठाकुरजी की पोशाक में जरी, मोती, नग और खासतौर से शीशे व स्टोन का बारीक काम किया जाता है। वहीं, कारीगर इकबाल ने अपनी कला के बारे में बताते हुए कहा कि पहले कागज पर डिजाइन तैयार कर स्केच बनाया जाता है, जिसके बाद मखमल, बादला, काउनी और लाल मोतियों की मदद से पारंपरिक कढ़ाई की जाती है। इन खूबसूरत पोशाकों की शुरुआती कीमत 10 रुपये से शुरू होकर लाखों रुपये तक जाती है।
सात समंदर पार तक पहुंच रही वृंदावन की पोशाकें
कारीगर इकबाल के अनुसार, उन्हें पोशाक तैयार करने के ऑर्डर एजेंटों के माध्यम से मिलते हैं। वृंदावन के हुनरमंद हाथों द्वारा तैयार की गई ये पोशाकें स्थानीय बाजारों से होते हुए अमेरिका, ब्रिटेन, हांगकांग, नेपाल, श्रीलंका, बाली, ऑस्ट्रेलिया, न्यूयॉर्क और थाईलैंड तक पहुंचाई जा रही हैं। श्रीकृष्ण की नगरी का यह हुनर आज पूरी दुनिया में ब्रज की कला और भारत की गंगा-जमुनी तहजीब का परचम लहरा रहा है।-----------
हिन्दुस्थान समाचार / महेश कुमार