अभाविप की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक भुवनेश्वर में संपन्न

 






गोरखपुर, 09 जून (हि.स.)।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद बैठक 29 से 31 मई तक भुवनेश्वर (ओडिशा) में संपन्न हुई। बैठक में शिक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, महिला सुरक्षा, सामाजिक चुनौतियों और वैश्विक परिदृश्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यापक चर्चा करते हुए चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। देशभर के विभिन्न प्रांतों से 400 से अधिक प्रतिनिधि कार्यकर्ताओं ने बैठक में सहभागिता की।

यह जानकारी मंगलवार को प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में अभाविप गोरक्ष प्रांत के प्रांत मंत्री शशिकांत मंगलम गुप्ता ने दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी एवं केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक में राष्ट्रीय परिदृश्य, शिक्षा व्यवस्था, युवाओं की भूमिका, सामाजिक-आर्थिक विषयों तथा समसामयिक चुनौतियों पर विस्तृत मंथन किया गया। साथ ही संगठनात्मक कार्यों की समीक्षा कर आगामी वर्ष की कार्ययोजना भी तय की गई।

बैठक में केंद्रीय कार्यसमिति द्वारा लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना हेतु पश्चिम बंगाल के जनमानस का अभिनंदन विषयक प्रस्ताव पारित किया गया। वहीं राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद में चार प्रमुख प्रस्तावों को सर्वसम्मति से स्वीकृति दी गई। इनमें शैक्षिक सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन, शहरी माओवाद की चुनौती, महिलाओं के शोषण एवं मतांतरण पर रोक तथा वैश्विक अनिश्चितता के दौर में राष्ट्रीय सजगता और संयम की आवश्यकता पर बल दिया गया।

प्रांत मंत्री ने बताया कि अभाविप आगामी वर्ष में स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम, वंदे मातरम् के 150 वर्ष, आपातकाल निषेध के 50 वर्ष, एसईआईएल राष्ट्रीय एकात्मता यात्रा के 60 वर्ष, श्री गुरु तेगबहादुर बलिदान दिवस के 350 वर्ष तथा संत रविदास के 650वें प्राकट्योत्सव जैसे विषयों पर देशव्यापी अभियान संचालित करेगी।

बैठक में राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर चर्चा हुई। अभाविप ने नीट-यूजी, सीयूईटी, सीबीएसई सहित विभिन्न राष्ट्रीय परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं एवं पेपर लीक की घटनाओं को विद्यार्थियों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ बताते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई तथा पूर्णतः पारदर्शी और त्रुटिरहित परीक्षा तंत्र विकसित करने की मांग की।

अभाविप ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत त्रि-भाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन का समर्थन करते हुए भारतीय भाषाओं में परीक्षाएं आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। परिषद का मानना है कि इससे विद्यार्थियों को अपनी भाषा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त होगी और देश की भाषायी विविधता को भी मजबूती मिलेगी।

बैठक में उद्योग जगत से विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसंधान, नवाचार, पेटेंट तथा भारतीय भाषाओं में अकादमिक लेखन को प्रोत्साहित करने के लिए निवेश बढ़ाने का आह्वान किया गया।

अभाविप ने उद्योग, विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के समन्वय से अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, उद्योग-प्रायोजित शोध एवं स्टार्टअप आधारित नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

इसके अलावा देश के विभिन्न केंद्रीय विश्वविद्यालयों में रिक्त कुलपति पदों पर शीघ्र नियुक्ति की मांग भी दोहराई गई। परिषद का कहना है कि लंबे समय तक कुलपति पद रिक्त रहने से विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक एवं शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होती है।

बैठक के अंतिम सत्र में विभिन्न संगठनात्मक दायित्वों की घोषणा भी की गई। पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री घनश्याम शाही तथा गोरक्ष प्रांत के प्रांत संगठन मंत्री पुनीत अग्रवाल के दायित्वों की पुनः घोषणा की गई। वहीं बस्ती विभाग के विभाग संगठन मंत्री आकाश गौण को काशी प्रांत का प्रांत संगठन मंत्री नियुक्त किया गया।

पत्रकार वार्ता में राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सम्पदा द्विवेदी, प्रांत मीडिया संयोजक शिवम पांडेय एवं महानगर मंत्री अभिषेक मौर्या सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे ।

हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय