प्रदेश की पाण्डुलिपियां हमारी सभ्यता, संस्कृति तथा ज्ञात परम्परा की जीवंत धरोहर : जयवीर सिंह
लखनऊ, 01 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार में मुख्यमंत्री याेगी की विशेष रुचि के क्रम में राज्य सरकार द्वारा प्राचीन पाण्डुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण के कार्य को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की प्राचीन ज्ञान परम्परा को सहेजने की महत्वाकांक्षी पहल ज्ञान भारतम् मिशन के द्वितीय चरण के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में पाण्डुलिपियों के डिजिटलीकरण का कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने मंगलवार काे ने बताया कि उत्तर प्रदेश भारतीय ज्ञान परम्परा, साहित्य, दर्शन, धर्म, कला, विज्ञान एवं संस्कृति की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध प्रदेश है। प्रदेश के विभिन्न संस्थानों, विश्वविद्यालयों, शोध संस्थाओं एवं अन्य संग्रहों में सुरक्षित पाण्डुलिपियाँ हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनका संरक्षण वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।
उन्होंने बताया कि ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में लगभग 30 लाख पाण्डुलिपियों का सर्वेक्षण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इस व्यापक सर्वेक्षण के माध्यम से प्रदेश में उपलब्ध पाण्डुलिपियों की जानकारी, उनके संग्रह-स्थलों तथा उनकी उपलब्धता का आकलन एवं सूचीकरण किया गया है। अब चिन्हित पाण्डुलिपियों का चरणबद्ध एवं वैज्ञानिक तरीके से डिजिटलीकरण किया जा रहा है।
द्वितीय चरण के अंतर्गत प्रदेश के पांच प्रमुख केन्द्रों पर पाण्डुलिपियों के डिजिटलीकरण का कार्य वर्तमान में संचालित है। इनमें गीता प्रेस, गोरखपुर, नागरी प्रचारिणी सभा वाराणसी, हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयागराज, राजकीय पाण्डुलिपि पुस्तकालय प्रयागराज, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी शामिल हैं।
इन केन्द्रों पर अब तक लगभग 14,000 पाण्डुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। डिजिटलीकरण के पश्चात तैयार की गई डिजिटल प्रतियां राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी पर अपलोड की जाएंगी, जिससे देश-विदेश के शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, विद्वानों एवं भारतीय ज्ञान परम्परा में रुचि रखने वाले लोगों को इस अमूल्य ज्ञान-संपदा तक व्यापक पहुंच प्राप्त हो सकेगी।
पाण्डुलिपियों के संरक्षण के इस अभियान को प्रदेश के अन्य क्षेत्रों तक विस्तारित करते हुए आठ अन्य प्रमुख केन्द्रों पर शीघ्र ही डिजिटलीकरण का कार्य प्रारम्भ किया जाएगा। इनमें महर्षि वाल्मीकि शोध संस्थान, अयोध्या, आचार्य पीठ लक्ष्मण किला, अयोध्या, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, सिद्धार्थनगर, श्री धर्माश्रुत शोध संस्थान, फिरोजाबाद, अन्तरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय, अयोध्या, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ, टैगोर पुस्तकालय, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ, प्राचीन इतिहास विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ शामिल हैं।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि “उत्तर प्रदेश की पाण्डुलिपियाँ हमारी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान परम्परा की जीवंत धरोहर हैं। ज्ञान भारतम् मिशन के माध्यम से इनका संरक्षण केवल दस्तावेजों का डिजिटलीकरण नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी ज्ञान-संपदा को सुरक्षित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है।”
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए उसे राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का कार्य किया जा रहा है। पाण्डुलिपियों का डिजिटलीकरण इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि शेष जनपदों में भी पाण्डुलिपियों के डिजिटलीकरण का कार्य शीघ्र प्रारम्भ कराया जाए, ताकि प्रदेश में उपलब्ध पाण्डुलिपि-संपदा का व्यापक एवं समयबद्ध डिजिटल संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
ज्ञान भारतम् मिशन के माध्यम से उत्तर प्रदेश अपनी हजारों वर्षों की ज्ञान परम्परा को सुरक्षित रखने के साथ-साथ उसे आधुनिक डिजिटल माध्यमों से नई पीढ़ी, शोध जगत और वैश्विक समुदाय तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्द्र पाण्डेय