समाज के कमजोर वर्गों की सेवा कर मानवता को सशक्त बनाने का संदेश है मकर संक्रांति : मिथलेश तोमर
मथुरा, 15 जनवरी(हि.स.)। गुरुवार मकर संक्रांति का पर्व सनातन धर्म प्रेमियों के लिए अनादिकाल से आस्था, श्रद्धा, सेवा और दान-पुण्य का प्रतीक रहा है। यह पर्व वर्ष में केवल एक बार आता है, किंतु इसका सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यंत व्यापक है। इस दिन श्रद्धालु प्रातःकाल पवित्र नदियों में स्नान कर सूर्य देव की आराधना करते हैं तथा पूजा-पाठ, जप-तप और दान-पुण्य के माध्यम से पुण्य अर्जित करते हैं।
प्रसिद्ध समाजसेवी मिथलेश तोमर ने अपने सहयोगियों के साथ गुरुवार वृंदावन स्थित कुष्ठ रोग आश्रम पहुँचकर वहाँ निवासरत रोगियों एवं उनके परिवारजनों की सेवा की। इस अवसर पर आश्रम में रह रहे लगभग 32 कुष्ठ रोगियों तथा उनके सात बच्चों को सर्दी से बचाव हेतु ऊनी वस्त्र वितरित किए गए। साथ ही आश्रम की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दो क्विंटल आटा, एक क्विंटल चावल, एक पीपा खाद्य तेल, सहित अन्य जरूरी खाद्य सामग्री भी प्रदान की गई।
इसके पश्चात श्रीमती मिथलेश तोमर ने अपना घर आश्रम, वृंदावन में भी पहुँचकर वहाँ रह रहे बेसहारा एवं निराश्रित लोगों को खाद्य सामग्री, वस्त्र तथा अन्य दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं का वितरण किया। आश्रमवासियों ने इस सेवा कार्य के लिए श्रीमती तोमर एवं उनके सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उपस्थित जनों ने कहा कि मकर संक्रांति जैसे पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों की सेवा कर मानवता को सशक्त बनाने का संदेश देते हैं। श्रीमती मिथलेश तोमर का यह सेवा कार्य समाज के अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। इस कार्यक्रम में समाजसेवी, स्वयंसेवक कान्हा राघव व प्रवीन राघव एवं स्थानीय नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
हिन्दुस्थान समाचार / महेश कुमार