पूर्वांचल में वेद शिक्षा को नई दिशा : महर्षि सावर्ण्य वेद विद्यापीठ के स्थायी भवन का भूमि पूजन संपन्न
गोरखपुर, 20 अप्रैल (हि.स.)। पूर्वांचल में वैदिक शिक्षा के प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए खजनी तहसील क्षेत्र के साख डांड़ पांडे में महर्षि सावर्ण्य वेद विद्यापीठ के स्थायी भवन हेतु भूमि पूजन कार्यक्रम विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। प्रातःकालीन शुभ बेला में आयोजित इस कार्यक्रम ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और देवमय बना दिया।
यह वेद विद्यालय पूर्वांचल का पहला ऐसा संस्थान है, जहाँ चारों वेदों की शिक्षा एक ही परिसर में प्रदान करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। यह संस्थान महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान, उज्जैन (मध्य प्रदेश) के मार्गदर्शन एवं संचालन में संचालित हो रहा है, जो देशभर में वैदिक परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विख्यात है।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 6 बजे वैदिक आचार्यों के मंत्रोच्चार एवं विधिवत पूजन के साथ हुई। विद्यालय के प्रबंधक पंडित अजय पांडे ने अपनी धर्मपत्नी के साथ विधिपूर्वक पूजन कर भवन की आधारशिला रखी। इस दौरान विद्वानों के मुख से उच्चारित वैदिक मंत्रों ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया।
ज्ञात हो कि यह विद्यालय पिछले नौ वर्षों से क्षेत्र में सुचारू रूप से संचालित हो रहा है और वैदिक शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। यहाँ से शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र आगे चलकर श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में वास्तुशास्त्र एवं ज्योतिष जैसे विषयों का अध्ययन कर रहे हैं, जो विद्यालय के लिए गौरव का विषय है।
इस शुभ अवसर पर विद्यालय परिवार के अध्यक्ष पंडित विजय पांडे, सचिव पंडित अजय पांडे, कोषाध्यक्ष रिंकू पांडे एवं कार्यकारिणी सदस्य राघवेंद्र कुमार पांडे, आमोद मद्धेशिया, जितेंद्र तिवारी (पूर्व चेयरमैन, इफको ऑल इंडिया ऑफिसर यूनियन), कुसुम तिवारी, एम. पी. शर्मा, गीता शर्मा सहित क्षेत्र के अनेक विद्वान, शिक्षक, गणमान्य नागरिक एवं विद्यालय के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों ने प्रसाद ग्रहण किया और विद्यालय के संस्थापक एवं प्रबंधन समिति को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं एवं बधाई दी।
यह भूमि पूजन न केवल एक भवन निर्माण की शुरुआत है, बल्कि पूर्वांचल में वैदिक संस्कृति, शिक्षा और भारतीय परंपरा के पुनर्जागरण की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय