मांगे नहीं मानी तो और तेज होगा आंदोलन
ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में दस्तावेज लेखक, स्टांप विक्रेता और अधिवक्ताओं का धरना 20वें दिन भी जारी
हाथरस, 29 जून (हि.स.)। सादाबाद तहसील परिसर में ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में दस्तावेज लेखकों, स्टांप विक्रेताओं और अधिवक्ताओं का धरना प्रदर्शन सोमवार को 20वें दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी उप निबंधक कार्यालय पहुंचे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ई-रजिस्ट्री प्रणाली को वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा लागू की जा रही नई ई-रजिस्ट्री या फ्रंट ऑफिस प्रणाली से दस्तावेज लेखकों की भूमिका समाप्त हो जाएगी। उनका कहना था कि यदि आम लोग सीधे ऑनलाइन माध्यम से रजिस्ट्री कराने लगेंगे, तो वर्षों से इस कार्य से जुड़े हजारों परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। यह व्यवस्था दस्तावेज लेखकों को बेरोजगार कर देगी। दस्तावेज लेखकों ने सरकार से उत्तर प्रदेश दस्तावेज लेखक नियमावली-1977 में संशोधन की मांग की।
उन्होंने कहा कि पंजीकृत दस्तावेज लेखकों को नए ई-पंजीकरण पोर्टल पर 'अधिकृत यूजर' के रूप में शामिल किया जाए, ताकि वे नई तकनीक के साथ भी अपनी सेवाएं जारी रख सकें और उनके रोजगार पर कोई संकट न आए। इसके अतिरिक्त, प्रदर्शनकारियों ने ई-पोर्टल पर लॉग-इन की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार दस्तावेज लेखकों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ बायोमेट्रिक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करे। उनका तर्क था कि यदि सरकार नई तकनीकी व्यवस्था लागू कर रही है, तो उससे जुड़े लोगों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उसकी जिम्मेदारी है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
धरना-प्रदर्शन के दौरान उत्तर प्रदेश दस्तावेज लेखक संघ के पूर्व सहायक लेखा परीक्षक श्याम सुंदर गिरी, अध्यक्ष राजकुमार दीक्षित, तेज बहादुर सिंह, मन्नू जायसवाल, संजय जायसवाल, शंकर लाल गोला, हजारीलाल सक्सेना आदि मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / मदन मोहन राना