“विदुषी सीता मिश्रा सेवा सम्मान” और ‘लोकरंग’ का आयोजन
लखनऊ, 15 सितंबर (हि.स.)। विदुषी सीता मिश्रा की जयंती के अवसर पर मंगलवार को राजधानी लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के निराला सभागार में “विदुषी सीता मिश्रा सेवा सम्मान-2026” और ‘लोकरंग’ का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज की पहली महिला कुलपति प्रो. सीमा सिंह को उनके शैक्षिक और सामाजिक क्षेत्र के विशिष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित विदुषी सीता मिश्रा सेवा सम्मान-2026 से अलंकृत किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रसिद्ध लेखक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक रामजी भाई ने नारी के परिवार और संस्कार पर प्रभाव की चर्चा करते हुए कहा कि, स्त्री सबको एक सूत्र में बांधकर सर्वांगीण विकास करने का सामर्थ्य रखती है। उन्होंने विदुषी सीता जी के संस्मरण साझा करते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने ऐसे आयोजनों को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को प्रगति के साथ परंपराओं का पालन करने की भी जरूरत है।
विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान ने कहा कि शिक्षा के द्वारा ही व्यक्ति वर्ग परिवर्तन कर सकता है। शिक्षक का सम्मान समाज का सम्मान होता है।
वरिष्ठ आईएएस डॉ चंद्रभूषण त्रिपाठी ने परिवार को प्रथम पाठशाला बताया। उन्होंने सभी से अपनी बोली और संस्कृति पर गर्व करने की बात कही। उन्होंने संस्कृत भाषा की विशेषताओं की चर्चा करते हुए उसके अधिक से अधिक प्रयोग की अपील की।
विदुषी सीता मिश्रा सेवा सम्मान-2026 सम्मान से सम्मानित हुईं प्रो. सीमा सिंह ने कहा कि यह सम्मान पाकर मुझे सुखद अनुभूति हो रही है। यह सम्मान मुझे नई ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करेगा।
यूपी स्टेट एनवायरमेंट एप्रेजल काउंसिल के अध्यक्ष कमलेश पांडे ने पर्यावरण, परिवार और समाज को पूरक बताते हुए उसके संरक्षण की बात कही। आकाशवाणी लखनऊ की कार्यक्रम प्रमुख सुमोना पांडे ने विदुषी सीता जी के संस्मरणों का जिक्र करते हुए उनके शालीन व्यवहार की चर्चा की।
वरिष्ठ पत्रकार और पर्यावरणविद राजेश राय ने विदुषी सीता से जुड़े कई संस्मरण साझा किए। उन्होंने कहा कि हर किसी की माँ की तरह चिंता करना उनकी स्वाभाविक प्रकृति थी। उन्होंने कमजोर वर्ग के बच्चों के उत्थान के लिए अतुलनीय प्रयास किए। सामाजिक, धार्मिक आयोजनों में भी उनकी विशेष सहभागिता रहती थी। श्री राम मंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवकों के रहने, खाने की व्यवस्था करने में सीता जी की प्रमुख भूमिका रही।
राष्ट्रधर्म पत्रिका के प्रभारी निदेशक सर्वेश चंद्र द्विवेदी ने संस्कार शून्य समाज को निष्प्राण बताया। उन्होंने कहा कि विदुषी सीता जी का संपूर्ण जीवन त्याग, तप और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है।
लखनऊ नगर निगम के कार्यकारिणी उपाध्यक्ष सुशील तिवारी पम्मी ने विदुषी सीता जी से पारिवारिक जुड़ाव की चर्चा की। उत्तर प्रदेश फिल्मबंधु के पूर्व संयुक्त सचिव राम मनोहर त्रिपाठी ने सीता की सहनशीलता और सामाजिक योगदान की चर्चा की। उन्होंने कहा कि हम लोग आज जहां तक पहुंचे हैं, उसके पीछे सिर्फ परिवार और शिक्षा का ही योगदान है। पूर्व अपर महाधिवक्ता ज्योति सिक्का ने संस्कारों को सबसे बड़ी पूंजी बताया। उन्होंने कहा कि सीता जी का परिवार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ परिवार के प्रति समर्पित परिवार है।
परिवार और संस्कार विषयक परिचर्चा में सभी वक्ताओं ने परिवार को संस्कार कि प्रथम पाठशाला मानते हुए वर्तमान संदर्भों में उसकी प्रासंगिकता पर चर्चा की। काव्य गोष्ठी में कवियों ने सभी को काव्य रस की धारा से सराबोर कर दिया। वही रविशंकर देहाती और साथियों ने लोकगीत और भजन के द्वारा सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के अंत में वंदे मातरम का सहगान हुआ। कार्यक्रम का संचालन शरद जगदीश मिश्र द्वारा किया गया।
इस अवसर पर प्रोफेसर अंबिका प्रसाद तिवारी, उपेंद्र कुमार सिंह, शैलेंद्र सिंह,ओम अवस्थी पंकज बिंद्रा,राघवेंद्र त्रिपाठी शैलेंद्र शर्मा राघवेंद्र ,पंकज अवस्थी, सुशील पांडे, सांत्वना अवस्थी, डॉ नीलम अग्रवाल, कामाक्षी त्रिवेदी, प्रणव अग्निहोत्री, प्रशांत त्रिवेदी, संदीप, आशीष, ओशीन, अभिषेक पार्षद, राजीव बाजपेई सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा