संपदा कार्यक्रम के अंतर्गत विलुप्त हो रहे अलगोजा वादन का अभिलेखीकरण
लखनऊ, 11 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की समृद्ध लोक संगीत परंपराओं एवं विलुप्तप्राय लोक वाद्यों के संरक्षण एवं अभिलेखीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान एवं उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में “संपदा” कार्यक्रम के अंतर्गत विलुप्त हो रहे अलगोज़ा वादन का अभिलेखीकरण कार्यक्रम का आयोजन उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी स्टूडियो, विपिन खंड, गोमती नगर, लखनऊ में किया गया।
यह जानकारी साेमवार काे उ0प्र0 लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी ने दी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में मथुरा के प्रसिद्ध लोक कलाकार सुखवीर एवं हरप्रसाद द्वारा अलगोजा एवं चंग वादन की पारंपरिक शैली का प्रभावशाली प्रदर्शन प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने अपने लोक वादन के माध्यम से ब्रज क्षेत्र की सांगीतिक विरासत, लोक संवेदनाओं एवं पारंपरिक धुनों को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उन्होंने बताया कि अलगोज़ा वादन एवं लोक संगीत परंपरा पर केंद्रित एक विशेष साक्षात्कार भी आयोजित किया गया।
कलाकारों का साक्षात्कार डॉ. शोभित नाहर, निदेशक, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी द्वारा लिया गया। साक्षात्कार के दौरान अलगोज़ा वादन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, इसकी तकनीकी विशेषताओं, वर्तमान चुनौतियों तथा नई पीढ़ी तक इस लोक परंपरा को पहुंचाने की आवश्यकता पर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तर प्रदेश एवं देश की विलुप्त होती लोक कलाओं एवं वाद्य परंपराओं का दस्तावेजीकरण कर उन्हें संरक्षित करना तथा लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करना है। उपस्थित कला प्रेमियों, शोधार्थियों एवं संगीत अनुरागियों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे लोक संस्कृति संरक्षण की दिशा में एक सार्थक एवं प्रेरणादायी पहल बताया।
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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन