आयुर्वेद भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा का हिस्सा : ब्रजेश पाठक

 




आयुर्वेद दिवस पर 1090 चौराहे से जनेश्वर मिश्र पार्क तक निकली बाइक रैली

लखनऊ, 23 सितंबर (हि.स.)।आयुर्वेद दिवस के अवसर पर बुधवार को लखनऊ के 1090 चौराहे से ‘स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद’ विषय पर बाइक रैली का आयोजन किया गया। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक व आयुष, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने बाइक रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली 1090 चौराहे से प्रारंभ होकर जनेश्वर मिश्र पार्क तक गई।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि आयुर्वेद भारत की समृद्ध एवं प्राचीन चिकित्सा परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा स्वस्थ एवं निरोगी जीवन की आधारशिला है। आयुर्वेद हमारी जीवनशैली से जुड़ा हुआ है और इसका महत्व वर्तमान समय में भी उतना ही प्रासंगिक है।उन्होंने कहा कि आज की जीवनशैली में लोग कई बार तत्काल राहत के लिए दवाओं का सहारा लेते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की उपयोगिता को समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की स्वीकार्यता आज भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्व के अनेक देशों में भी इसके प्रति रुचि बढ़ी है।श्री पाठक ने कहा कि हमारी रसोई में उपयोग होने वाले अनेक पारंपरिक मसाले एवं खाद्य पदार्थ भी भारतीय पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धति से जुड़े हुए हैं। इसलिए आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने की शुरुआत प्रत्येक व्यक्ति को अपने परिवार और आसपास के लोगों से करनी चाहिए। उन्होंने आह्वान किया कि आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाकर स्वस्थ भारत और सशक्त भारत के संकल्प को साकार करने में सभी अपनी भूमिका निभाएं।

आयुर्वेद सिर्फ उपचार नहीं, स्वस्थ जीवन की पद्धति : दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’इस अवसर पर आयुष, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने कहा कि आयुर्वेद केवल उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की एक समग्र जीवन पद्धति है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद कोई नई चिकित्सा व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह सदियों से भारतीय जीवन परंपरा का हिस्सा रहा है और समाज इसका विभिन्न रूपों में प्रयोग करता आया है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद आयुर्वेद एवं पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को संस्थागत रूप से आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं। कोरोना काल के दौरान भी बड़ी संख्या में लोगों ने आयुर्वेद एवं पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों के महत्व को समझा और इनके प्रति लोगों की रुचि बढ़ी।डॉ. मिश्र ने कहा कि आयुर्वेद की वैज्ञानिक उपयोगिता को लेकर शोध की आवश्यकता पर लगातार काम किया जा रहा है। देश में 40 से अधिक संस्थाएं आयुर्वेद एवं उससे संबंधित विषयों पर शोध कार्य कर रही हैं।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव, आयुष रंजन कुमार, महानिदेशक, आयुष जी.एस. प्रियदर्शी, विशेष सचिव, आयुष मदन सिंह, निदेशक, आयुष डॉ. नारायण दास सहित आयुष विभाग के अधिकारी, चिकित्सक, कर्मचारी एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन