दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटियों की प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र

 


बाराबंकी, 06 नवंबर (हि.स.)। रामनगर स्थित बैजनाथ सोल एजेंसी परिसर में भगवान धन्वंतरि की जयंती श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विधि-विधान से भगवान धन्वंतरि का पूजन-अर्चन कर लोगों के उत्तम स्वास्थ्य, निरोगी जीवन और सुख-समृद्धि की कामना की गई। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण परिसर में लगाई गई दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटियों की प्रदर्शनी रही, जिसमें कई दर्जन औषधीय वनस्पतियों को प्रदर्शित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रधानमंत्री स्वर्ण पदक से सम्मानित एवं राष्ट्रीय किसान क्रांति दल के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सोनी ने फीता काटकर जड़ी-बूटियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए विभिन्न औषधीय पौधों और उनके पारंपरिक उपयोगों की जानकारी प्राप्त की। प्रदर्शनी में अदरक, मीठा करौंदा, शतावरी, अश्वगंधा, सफेद मूसली समेत अनेक दुर्लभ एवं उपयोगी जड़ी-बूटियां आकर्षण का केंद्र रहीं।

इस मौके पर डॉ. प्रदीप कुमार सोनी ने कहा कि भगवान धन्वंतरि आयुर्वेद और चिकित्सा विज्ञान के आराध्य देव हैं। भारतीय आयुर्वेदिक परंपरा में जड़ी-बूटियों का सदियों से विशेष महत्व रहा है। प्रकृति ने हमें अनेक ऐसी औषधीय वनस्पतियां प्रदान की हैं, जिनका पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में विभिन्न रोगों के उपचार और स्वास्थ्य संरक्षण के लिए उपयोग किया जाता रहा है। इस प्राचीन चिकित्सा विरासत को संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

इस दौरान वैद्य किशोर पुजारी ने प्रदर्शनी में रखी गई विभिन्न जड़ी-बूटियों के पारंपरिक औषधीय गुणों और उनके उपयोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में अनेक वनस्पतियों का महत्वपूर्ण स्थान है और इनके सही ज्ञान एवं विधिपूर्वक उपयोग की जानकारी लोगों तक पहुंचाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि ऐसी प्रदर्शनियों से लोगों को दुर्लभ औषधीय वनस्पतियों को करीब से जानने और आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा को समझने का अवसर मिलता है। कार्यक्रम में आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और औषधीय पौधों के संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।

इस अवसर पर अधिवक्ता अमर पाल सिंह सचिन सोनी, टीनो सोनी, अमित सोनी समेत बड़ी संख्या में आयुर्वेद से जुड़े वैद्य एवं चिकित्सक तथा स्थानीय लोग मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / पंकज कुमार चतुवेर्दी