राम वनगमन का प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु, छलक उठीं आंखें
जौनपुर, 25 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जौनपुर स्थित बीआरपी इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के पांचवें दिन रविवार को कथावाचक आचार्य शांतनु महाराज ने भगवान श्रीराम के वनगमन का मार्मिक प्रसंग सुनाया। श्रीराम के त्याग, माता सीता के समर्पण और लक्ष्मण की भ्रातृभक्ति का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा पंडाल में कई श्रोताओं की आंखें नम हो गईं।
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं समाजसेवी ज्ञान प्रकाश सिंह के नेतृत्व में आयोजित कथा में आचार्य शांतनु महाराज ने श्रीराम और माता सीता के विवाह के बाद अयोध्या आगमन से लेकर राज्याभिषेक की तैयारियों तथा वनवास की घटना का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियों से पूरी अयोध्या में उत्सव का माहौल था। इसी बीच दासी मंथरा के बहकावे में आकर महारानी कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वरदान मांग लिए। उन्होंने भरत के लिए राजसिंहासन और श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा। इससे अयोध्या की खुशियां अचानक शोक में बदल गईं।
आचार्य ने कहा कि राजा दशरथ श्रीराम से अत्यंत प्रेम करते थे, लेकिन दिए गए वचन की मर्यादा के कारण वह विवश थे। दूसरी ओर, श्रीराम ने पिता के वचन की रक्षा के लिए बिना किसी विरोध के वनवास स्वीकार कर लिया। उनके लिए राजसिंहासन से बढ़कर धर्म, सत्य और मर्यादा थी।
उन्होंने बताया कि माता सीता ने भी पति के साथ वन जाने का निर्णय लिया, जबकि लक्ष्मण ने बड़े भाई की सेवा और सुरक्षा के लिए राजमहल के सुखों का त्याग कर दिया। श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनगमन की घटना सुनाते हुए कथावाचक ने बताया कि जिस अयोध्या में राज्याभिषेक की तैयारियां चल रही थीं, वहां श्रीराम के वनवास की खबर से शोक छा गया। प्रजा अपने प्रिय राजकुमार को रोकना चाहती थी, लेकिन श्रीराम पिता के वचन और अपने कर्तव्य के पालन के लिए दृढ़ रहे।
महाराज दशरथ के पुत्र-वियोग और श्रीराम के त्याग का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावुक हो गए। आचार्य शांतनु महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन कर्तव्यपालन, त्याग, आज्ञाकारिता और मर्यादा का संदेश देता है। माता सीता का समर्पण और लक्ष्मण की भ्रातृभक्ति भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
कथा में टीडी कॉलेज के पूर्व अध्यक्ष राजेश सिंह, भाजपा नेता एवं मंत्री गिरीश यादव, आईएएस शिव प्रकाश सिंह, आरएसएस प्रचारक राजकुमार सिंह, महंत नरसिंह दास, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष मनोज सिंह, भाजपा काशी क्षेत्र के क्षेत्रीय मंत्री अजीत सिंह, डॉ. रामसूरत मौर्य, अमित सिंह, सुमित सिंह, दीपक सिंह, शिव सिंह और भुवनेश्वर सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कथा के श्रवण के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव