मठिया में राम वनगमन लीला का भावपूर्ण मंचन, पिता के वचन की मर्यादा निभाने वन गए प्रभु श्रीराम
गोरखपुर, 28 अक्टूबर (हि.स.)। ग्रामसभा मठिया में श्री श्री रुद्र महायज्ञ के अंतर्गत आयोजित रामलीला में बुधवार की रात जयमाया आदिशक्ति रामलीला मंडल के कलाकारों ने राम वनगमन प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया। प्रभु श्रीराम द्वारा पिता राजा दशरथ के वचन की मर्यादा बनाए रखने के लिए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार करने के प्रसंग ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। रामलीला देखने के लिए पंडाल श्रद्धालुओं से भरा रहा।
मंचन के दौरान दिखाया गया कि माता कैकेयी के वरदानों के कारण राजा दशरथ को श्रीराम को वनवास भेजने का कठोर निर्णय लेना पड़ता है। पिता के वचन को सर्वोपरि मानते हुए प्रभु श्रीराम बिना किसी विरोध के 14 वर्ष के लिए वन जाने को तैयार हो जाते हैं। उनके साथ माता सीता और अनुज लक्ष्मण भी वन जाने का निर्णय लेते हैं। इस मार्मिक प्रसंग ने त्याग, प्रेम, समर्पण और पारिवारिक मर्यादा का संदेश दिया।
रामलीला के माध्यम से कलाकारों ने बताया कि एक आदर्श पुत्र का अपने पिता के प्रति कैसा कर्तव्य होना चाहिए, भाइयों के बीच परस्पर प्रेम और त्याग की भावना कैसी होनी चाहिए तथा पति-पत्नी का संबंध विश्वास और समर्पण पर किस प्रकार आधारित होना चाहिए। मंचन ने दर्शकों को यह संदेश भी दिया कि पारिवारिक कलह से सुख-शांति प्रभावित होती है, जबकि आपसी प्रेम, विश्वास और मर्यादा परिवार को मजबूत बनाते हैं।
जयमाया आदिशक्ति रामलीला मंडल के कलाकारों ने अपने सजीव अभिनय से रामायण के प्रसंगों को मंच पर उतारा। प्रभु श्रीराम के वनगमन के दृश्य के दौरान पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो उठे। कलाकारों के अभिनय को दर्शकों ने सराहा।
इस अवसर पर रामलीला के प्रोपराइटर सिकंदर राणा, लोकगीत एवं भजन गायक रिंटू पांडेय सहित गांव के गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय